Update and Rohtak Meeting briefs on Jat Reservation Agenda from Shri Hawa Singh Sangwan
Hawa Singh Sangwan
जाट आरक्षण के लिए रैली 11 मई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर
रोहतक। दिनांक 12 अप्रैल, रविवार को प्रात: 11 बजे चौ० छोटूराम धर्मशाला में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की बैठक हुई, जिसमें दर्जन भर खाप प्रधानों ने भी हिस्सा लिया। बैठक में जाट आरक्षण पर समीक्षा की गई, जिसमें समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह दलाल ने सभी प्रतिनिधियों को अपने-अपने विचार रखने का अवसर दिया, जिसमें समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका डाली है, जिस पर जाट समाज को मात्र एक प्रतिशत उम्मीद है कि इसमें जाट समाज के पक्ष में कोई फैसला आएगा। हो सकता है, इसके बाद केंद्र सरकार क्यूरेटिव याचिका दाखिल करे, लेकिन हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार जाट आरक्षण का मामला सवैंधानिक पीठ में ले जाए। जाट समाज की तरफ से भी पुनर्विचार याचिका 13 अप्रैल को डाली जाएगी। देखने में आया है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उन मामलों में भी लागू किया जा रहा है, जिनमें 17 मार्च से पहले दाखिलों व नौकरियों में प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। ये भी देखने में आया है कि यूपीएससी का परिणाम रोके रखा है, जो पूर्णतया जाट समाज के साथ पक्षपात है। यदि इसमें भी फैसले को लागू किया जाता है, तो हमारे बच्चों का भविष्य चौपट हो जाएगा। इसलिए हमें इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय में गुहार लगानी पड़ेगी। इसके लिए जो भी बच्चे प्रभावित हैं, वे आपस में संपर्क करके एक अच्छे वकील के द्वारा न्यायालय में याचिका प्रस्तुत करें। इसके अलावा कोई दूसरा चारा प्रतीत नहीं होता।
बैठक में ये समिति की तरफ से यह फैसला लिया गया कि खापों को मीटिंग करके किसी एक खाप के प्रधान को को-आर्डीनेटर नियुक्त किया जाए। यदि खापें ऐसा करती हैं तो हमारा संगठन खापों के नेतृत्व में आंदोलन करने के लिए तैयार है। यदि खापें ऐसा नहीं कर पाईं, तो हमारी संघर्ष समिति आंदोलन करेगी और खापों के सहयोग की भी प्रार्थना करेगी। इसके अतिरिक्त यह भी फैसला लिया गया कि 11 मई को प्रस्तावित रैली जंतर-मंतर पर अवश्य होगी, जिसमें सभी जाट संगठन और खापें हिस्सा लेंगी और आगे की रणनीति का वहीं पर फैसला ले लिया जाएगा। उपस्थित खाप प्रधानों के अतिरिक्त संघर्ष समिति के रोहतक जिलाध्यक्ष धर्मपाल हुड्डा, हिसार जिलाध्यक्ष दलजीत पंघाल, सोनीपत जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह मोर, झज्जर जिलाध्यक्ष मास्टर ताराचंद जाखड़, भिवानी के जिलाध्यक्ष रघुबीर सिंह बूरा, जींद के जिलाध्यक्ष चंद्र सिंह चहल, रेवाड़ी के जिलाध्यक्ष सूबेदार रामचंद्र टीकला, पानीपत के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह खरब, प्रदेश महासचिव रामकिशन महलावत, महासचिव कप्तान जंगवीर सिंह मलिक, महासचिव कप्तान प्रताप सिंह, सरपंच रामकुमार धुआं आदि ने भी अपने विचार प्रकट किए।
बैठक में अंतिम फैसला यह लिया गया कि आंदोलन शुरू करने से पहले जाट समाज मेें इसका जोर-शोर से प्रचार किया जाए ताकि लाखों की संख्या में जाट और जाटनियां आंदोलन में भाग ले सकें। समिति में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि जब तक जाटों को अपना सवैंधानिक अधिकार नहीं मिलता, जाट अपना आंदोलन जारी रखेंगे, चाहे इसमें कितनी भी कुर्बानी क्यों न देनी पड़ें। जाट आरक्षण का मुद्दा जाट समाज के लिए करो या मरो का फैसला है।
अगली बैठक 21 अप्रैल को हिसार की जाट धर्मशाला में होगी, जिसके लिए सभी जाट भाईयों को वहां पहुंचने के लिए अनुरोध किया जाता है। अभी समय आ गया है कि जाट अपनी एकता और अपने अधिकार के लिए जागरूकता का उदाहरण पेश करें।
Hawa Singh Sangwan
जाट आरक्षण के लिए रैली 11 मई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर
रोहतक। दिनांक 12 अप्रैल, रविवार को प्रात: 11 बजे चौ० छोटूराम धर्मशाला में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की बैठक हुई, जिसमें दर्जन भर खाप प्रधानों ने भी हिस्सा लिया। बैठक में जाट आरक्षण पर समीक्षा की गई, जिसमें समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह दलाल ने सभी प्रतिनिधियों को अपने-अपने विचार रखने का अवसर दिया, जिसमें समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका डाली है, जिस पर जाट समाज को मात्र एक प्रतिशत उम्मीद है कि इसमें जाट समाज के पक्ष में कोई फैसला आएगा। हो सकता है, इसके बाद केंद्र सरकार क्यूरेटिव याचिका दाखिल करे, लेकिन हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार जाट आरक्षण का मामला सवैंधानिक पीठ में ले जाए। जाट समाज की तरफ से भी पुनर्विचार याचिका 13 अप्रैल को डाली जाएगी। देखने में आया है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उन मामलों में भी लागू किया जा रहा है, जिनमें 17 मार्च से पहले दाखिलों व नौकरियों में प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। ये भी देखने में आया है कि यूपीएससी का परिणाम रोके रखा है, जो पूर्णतया जाट समाज के साथ पक्षपात है। यदि इसमें भी फैसले को लागू किया जाता है, तो हमारे बच्चों का भविष्य चौपट हो जाएगा। इसलिए हमें इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय में गुहार लगानी पड़ेगी। इसके लिए जो भी बच्चे प्रभावित हैं, वे आपस में संपर्क करके एक अच्छे वकील के द्वारा न्यायालय में याचिका प्रस्तुत करें। इसके अलावा कोई दूसरा चारा प्रतीत नहीं होता।
बैठक में ये समिति की तरफ से यह फैसला लिया गया कि खापों को मीटिंग करके किसी एक खाप के प्रधान को को-आर्डीनेटर नियुक्त किया जाए। यदि खापें ऐसा करती हैं तो हमारा संगठन खापों के नेतृत्व में आंदोलन करने के लिए तैयार है। यदि खापें ऐसा नहीं कर पाईं, तो हमारी संघर्ष समिति आंदोलन करेगी और खापों के सहयोग की भी प्रार्थना करेगी। इसके अतिरिक्त यह भी फैसला लिया गया कि 11 मई को प्रस्तावित रैली जंतर-मंतर पर अवश्य होगी, जिसमें सभी जाट संगठन और खापें हिस्सा लेंगी और आगे की रणनीति का वहीं पर फैसला ले लिया जाएगा। उपस्थित खाप प्रधानों के अतिरिक्त संघर्ष समिति के रोहतक जिलाध्यक्ष धर्मपाल हुड्डा, हिसार जिलाध्यक्ष दलजीत पंघाल, सोनीपत जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह मोर, झज्जर जिलाध्यक्ष मास्टर ताराचंद जाखड़, भिवानी के जिलाध्यक्ष रघुबीर सिंह बूरा, जींद के जिलाध्यक्ष चंद्र सिंह चहल, रेवाड़ी के जिलाध्यक्ष सूबेदार रामचंद्र टीकला, पानीपत के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह खरब, प्रदेश महासचिव रामकिशन महलावत, महासचिव कप्तान जंगवीर सिंह मलिक, महासचिव कप्तान प्रताप सिंह, सरपंच रामकुमार धुआं आदि ने भी अपने विचार प्रकट किए।
बैठक में अंतिम फैसला यह लिया गया कि आंदोलन शुरू करने से पहले जाट समाज मेें इसका जोर-शोर से प्रचार किया जाए ताकि लाखों की संख्या में जाट और जाटनियां आंदोलन में भाग ले सकें। समिति में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि जब तक जाटों को अपना सवैंधानिक अधिकार नहीं मिलता, जाट अपना आंदोलन जारी रखेंगे, चाहे इसमें कितनी भी कुर्बानी क्यों न देनी पड़ें। जाट आरक्षण का मुद्दा जाट समाज के लिए करो या मरो का फैसला है।
अगली बैठक 21 अप्रैल को हिसार की जाट धर्मशाला में होगी, जिसके लिए सभी जाट भाईयों को वहां पहुंचने के लिए अनुरोध किया जाता है। अभी समय आ गया है कि जाट अपनी एकता और अपने अधिकार के लिए जागरूकता का उदाहरण पेश करें।
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