albaadi baalkaan key kissey.

Ek be meri chotti bebe zidd laga k baith gi ek main ib bal koni katwaun ar main to lambe bal rakhungi choti banungi jib wa ghani e chotti thi hogi 5 saal ki to mere papa usne bhaka k nai k le ge ek tera badhiya sa cutting karwaunga tu ghane suthri lagegi ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,ude jaake wa roye ar nu kah main koni katwaun bal papa ne sochi ek chori mere aage ghani rowegi to nai te kah di bhai main ib aya tu is chori ka badhiya sa cutting kr diye ar nu kah k papa gharan aage,,,,,,,,,,,,,,,nai ka chora bhi ude e baitha tha nai bolya bhai main ib aya tu ade e rahiye dukan ka dhayan rakhiye nai chaya gaya meri bebe boli tera bapu mere bal katega wo bolya haan to meri bebe bolyi chal tere bapu k aan te pahlan main tera cutting kr dun ar fer tu mera kr diye tera bapu te bera ni kad awega chora man gaya ar meri bebe ne wo baitha diya ar uske sir pe kai jagah kanchi mar di uske kuch bal chotte kr diye ar kitte te katti ganja kr diya chore ka naksha e bigaad diya ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,ar bus uska yo special cutting kr k apne gharan aagi,,,,,,,,jib nai aya ar usne apne chore ka hal dekhya bechara ghana dukhi ho gaya usne apna chora pura e ganja karna pada ar fer wo apne chore ne mhare gharan leke aya ak dekhiyo choudhry sahab apki chori ne yo k kr diya mane to apna chora ganja krna pad gaya,,,,,,,,fer meri bebe khel khal k ghar ayi te poochya e yo k kra tane bolyi yo nai mere bal kate tha is tai main iske chore ka yo hal kr diya ,,,,,,,,,,,,,,,,,,
 
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thik kaam kra, fer chhodega apne chhore ne jaata ke balkaa dhore. ha ha aaaaaaaaaa.
Ek be meri chotti bebe zidd laga k baith gi ek main ib bal koni katwaun ar main to lambe bal rakhungi choti banungi jib wa ghani e chotti thi hogi 5 saal ki to mere papa usne bhaka k nai k le ge ek tera badhiya sa cutting karwaunga tu ghane suthri lagegi ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,ude jaake wa roye ar nu kah main koni katwaun bal papa ne sochi ek chori mere aage ghani rowegi to nai te kah di bhai main ib aya tu is chori ka badhiya sa cutting kr diye ar nu kah k papa gharan aage,,,,,,,,,,,,,,,nai ka chora bhi ude e baitha tha nai bolya bhai main ib aya tu ade e rahiye dukan ka dhayan rakhiye nai chaya gaya meri bebe boli tera bapu mere bal katega wo bolya haan to meri bebe bolyi chal tere bapu k aan te pahlan main tera cutting kr dun ar fer tu mera kr diye tera bapu te bera ni kad awega chora man gaya ar meri bebe ne wo baitha diya ar uske sir pe kai jagah kanchi mar di uske kuch bal chotte kr diye ar kitte te katti ganja kr diya chore ka naksha e bigaad diya ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,ar bus uska yo special cutting kr k apne gharan aagi,,,,,,,,jib nai aya ar usne apne chore ka hal dekhya bechara ghana dukhi ho gaya usne apna chora pura e ganja karna pada ar fer wo apne chore ne mhare gharan leke aya ak dekhiyo choudhry sahab apki chori ne yo k kr diya mane to apna chora ganja krna pad gaya,,,,,,,,fer meri bebe khel khal k ghar ayi te poochya e yo k kra tane bolyi yo nai mere bal kate tha is tai main iske chore ka yo hal kr diya ,,,,,,,,,,,,,,,,,,
 
तेरी अलबाद चंद्रकांता की ढाल हो ली न्यू इ नहीं बेर पट-ता कुण कुण है? कद सी थम्बेगा ?

dukhi naa ho rakesh, ibb ee mey meraa ke kasoor ak tu inn me punjhad naa laawan paandaa . baaki khatam ho jaangi ek-aadh minhe me ,fer teri salaah ke anusaar jaani chor ke kisse suru karoongaa .
 
एक बे मेरी दादी ने हाम चारुं भाई-बहन घाल दिए बाल कटवान नाइ धोरे | जब ताहि नाइ नाज लिया करदे फसल पे एर उनने नया-नया पिस्से लेवन का रिवाज चलाया था | जब बालकां के आठ आने एर बड्डे के एक रपिया अर हर फसल पे नाज , जो लिया करदे वो | मेरी दादी मन्ने २ रपिये देंदी अक जा सारयां के कटवा ल्या | हाम चारुं एक रपिये की तो पहलम टॉफी खा लेनदे एर फेर नाइ के धोरे जांदे | नाइ का मन मस्होश के ने १ रपिया ले लेंदा | २-३ बे नु करें पाछे नाइ का बाल काटन तें नाट ग्या ,अक पहलम पिस्से दे ना तो ना काटूँ | मन्ने ऊ ताहि चार अट्ठनी दिखाई ( जब एक रपिये के सिक्के ना चाले थे ) एर नु बोल्या अक इब्ब तो काट दे , में पुरे पिस्से ल्या र्या सूँ | मन्ने पहलम आपने भाई -बहाना के बाल कटवाए एर वे घरां खंदा दिए | एर फेर आपने कटवा कें एर धर कें ऊके हाथ पे २ अट्ठन्नी एर डाकयाँ आया | वो गाल बकदा रहगया एर जब पाछे फेर कददे ऊ नाइ के धोरे बाल कटवान नि गया |
 
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wo kaatyaa rog jaataniyaa aaley tewar bachapan me-a dikhaa diye.
 
जब मेरे बाबू हर न्यारे होए , तो खेती करनीया कोए रह्या कोणी, सब नोकरी कर्निये थे | हामने खाती, लुहार , नाइ, छिम्बी सब हटा दिए जो नाज के बदले साल भर काम कर्या करदे | मन्ने लोहे का बन्दुकडा , (जिन्हें बारूद भर कें एर सड़क पे मार कें बजाया करें) बनवाना था | महारा लुहार तो नाट गया ,अक इब्ब हाम थारे लुहार कोणी, पिस्से दे गा तो बना दयांगे | में सुरिंदर ( वो-ए जिन्हें गिन्हुआ की भरी गाडी में आग लायी थी ) हर के लुहार- दाने धोरे चाल्या गया एर सुरेंदर के दादा का ना ले कें ने ,नु बोल्या अक में उनके तें सूँ, एर मेरा बन्दुकडा बना दो ,ऊने दो दिन में बना के दे दिया | दो तीन दिन पाछे मेरा बन्दुकडा देख कें सुरेंदर भी नु बोल्या अक में भी बनवाऊंगा | तन्ने की पे बनवाया से, तो मन्ने बता दिया अक दाने लुहार पे | वो भी पून्च्ग्या दाने लुहार धोरे ,एर आपने दादा का नाँ ले के बोल्या अक में उनके तें सूँ ,मेरा बन्दुकडा बना दो | दाने लुहार भाज्या ऊ की गेल अक झूठ बोले २-३ दिन पहलम तो उनका छोरा बनवा के ले गया था, तू किथों आया | फेर सुरेंदर आपने दादा नु लेगया जब जा कें उका बन्दुकडा बन्या, एर में साल भर ताहि दाने लुहार आली गाल माँ के भी ना लिकड़ा , अक कदे मन्ने पिछाण ना ले | १०० लुहार की १ जाट की |
 
एक बे की बात से ,में १२ साल का था एर आठ्मी में पढ़या करदा | म्हारी स्कूल की ड्रेस धोला पजामा एर लीला कुडता होया करदी | मन्ने एक छिम्बी के धोरे नया कुडता -पजामा सिम्वाना दे दिया | वो पहलम तो नु बोल्या २-३ दिन में सीम के दे दूंगा | पर उंने एक हफ्ता ला दिया एर फेर भी कोणी सीम्या | मन्ने आपने पहल्ड़े लत्ते भी कोणी धोये थे ,अतवार ने अक नए पहर के जावूंगा | फेर वो न्यू बोल्या अक में रात ने सीम दूंगा एर तडके-तड़क आ कें ले जाइए | आगले दिन सोमवार नु में पोहंच्ग्या ७ बजे ,एर मन्ने ऊ पे आपने लत्ते मांगे , वो नु बोल्या इब्बे कोणी सिम्मे सें | सांझ ताहि सीम दूंगा | मेरे उठ्या छो , मखा स्कूल नि जान पाया तो बाबू तोड़े गा | एर भुन्ड़े लत्ते पहर के गया तो पि.टी.आई. तोड़े गा | उडे एक गठड़ी पड़ी थी लत्त्यां की बंधी ,मन्ने वा ठाई एर दुडकी हो लिया | छिम्बी ने रोला मचाया अक रे दे जा इनका बियाह से | में बोल्या पहलम मेरे लत्ते सीम दे एर म्हारे घरां ले आइये जब दूंगा | माड़ी दूर तो छिम्बी भाज्या मेरी गेल में कित थावूँ था ऊ के | वो तो तीन चार घंट्या में -ए आ लिया कुडता -पजामा सीम कें ने |धांगी गेल धिन्ग्ताना |
 
एक बे मेरे मामा का छोरा गुलू फोगाट मेरे धोरे मुंबई आवन लाग्र्या था ट्रेन में, गर्मी की छुटियाँ में टेम पास करण खातर | जब वो मरे धोरे पोंच्या तो मन्ने देख्या अक वो ऊ के साइज तैं बड्डे जूते पहर रह्या था एर बढ़िया भी घने थे , मन्ने बुझी अक रे ये तेरे तो ना लागते | जब वो सुतया था तो कोए ऊ के जूते पहर ग्या | एर डाकि २-३ डिब्बे आगे जा कें किस्से और सुत्ये बन्दे के जूते पहर कें आग्या |
 
आड़े मुंबई में एक मेरा बेच मेट था सुहाग ,बिषान गाम का | वो सेनिक स्कूल कुंझ्पुरे का पास आउट था | तो उने होस्टल में रहवन के सारे गुरां का बेरा था | वो जब उठ्या करदा जब सारे जने मेस में जा लेंदे नाश्ता करण | कुंकी उस बखत बाथरूम खाली हो जाया करदे | एर सारी हान खेस ओढ़े हंडे जाया करदा | एर जब सब क्लास खातर चाले जांदे तो वो सारयां में पाछे मेस में जाया करदा नुई खेश ओढ़े-ओढ़े | मेस में प्रोपर ड्रेस के बिना जाना मना था | था भी वो लाम्बा कीकर सिंह | एक दिन उस टेम का मेस इंचार्ज एक ठाडा-तगड़ा भैया उने मेस में बाडन तें नाट ग्या | जब १-२ जने-ए मेस में थे | सुहाग ने खेश तार कें एक ओड़ ने धर दिया एर एक-ए हाथ चलाया था | भैया सों-पसार | भिया बेहोश हो चुका था ,एक तो करड़ा घुंशा लाग्या एर दुसरा उप्पर तें-ए धडाम तें पड्या | उंने ठा कें डिस्पेंसरी ले गे जब जा कें वो ठीक होया | हाम ने ऊ दिन बेरा पाट्या अक सुहाग स्कूल गेम्स का नेशनल बोक्सिंग चेम्पिंअन रह चुका था | ऊ दिन पाछे ऊ भैये ने सुहाग ताहि तो किम्मे ना कही चाहे वो कच्छे-२ में-ए चाल्या जांदा | छुपा रुस्तम |
 
म्हारा उनिवारसिटी कोलेज में ६-७ जणा का टयोल था | हाम सारे जाने कट्ठे रंदे सारा दिन | में उन् सारयां में छोटा था | मेरी वाज भी माड़ी पतली थी | तो कदे- कदाऊ हाम पिकचर देखन जाया करदे | जब आधे भा तें पिक्चर की टिकट मिल्या करदी कोलेज के बालकां नु | उड़े घनी भीड़ होया करदी एर छोरे जूत्याँ सुधाँ एक दुसरे के उप्पर चढ़ जांदे | सब के कपडे भी खराब हो जांदे | मन्ने एक आइडिया काढ राख्या था | हाम पहलम दूर खड़े रंदे एर जब खिड़की खुल जांदी एर सारे हांगा लांदे तो उनकी टांग चोडी हो जांदी | में छोटा होने के कारण म्हारे सारयां के पिस्से एर आईकार्ड ले कें ने तले-ए-तले उन् की टांगा तले के जा कें एर खिड़की धोरे खडा हो जांदा | एर जब उड़े रूका मारदा टिकट आले तें अक रे भाई तावला सा टिकट दे दे में तो मर गी आड़े, तो वो नु सोचदा अक कोए छोरी दब री से कूंगराँ तले , एर सेड दे सी ने टिकट दे देंदा | किस्से ने टिकट मिलदी एर किस्से ने नि | पर म्हारा टोल पिक्चर जरूर देख कें आया करदा |
 
bhai idea to tera ghana kasutaa tha.
म्हारा उनिवारसिटी कोलेज में ६-७ जणा का टयोल था | हाम सारे जाने कट्ठे रंदे सारा दिन | में उन् सारयां में छोटा था | मेरी वाज भी माड़ी पतली थी | तो कदे- कदाऊ हाम पिकचर देखन जाया करदे | जब आधे भा तें पिक्चर की टिकट मिल्या करदी कोलेज के बालकां नु | उड़े घनी भीड़ होया करदी एर छोरे जूत्याँ सुधाँ एक दुसरे के उप्पर चढ़ जांदे | सब के कपडे भी खराब हो जांदे | मन्ने एक आइडिया काढ राख्या था | हाम पहलम दूर खड़े रंदे एर जब खिड़की खुल जांदी एर सारे हांगा लांदे तो उनकी टांग चोडी हो जांदी | में छोटा होने के कारण म्हारे सारयां के पिस्से एर आईकार्ड ले कें ने तले-ए-तले उन् की टांगा तले के जा कें एर खिड़की धोरे खडा हो जांदा | एर जब उड़े रूका मारदा टिकट आले तें अक रे भाई तावला सा टिकट दे दे में तो मर गी आड़े, तो वो नु सोचदा अक कोए छोरी दब री से कूंगराँ तले , एर सेड दे सी ने टिकट दे देंदा | किस्से ने टिकट मिलदी एर किस्से ने नि | पर म्हारा टोल पिक्चर जरूर देख कें आया करदा |
 
हाम जद बारमी किलास म पढया करते | आर जद किलास म जाण का मन कोणी होया करता तो हाम कठ्ठे १२-१३ जणे होया करते फ्राड. म | आर फिल्म देखण जाया करते | हाम टिकट लिया करते ८-९ | आर जद गेट म बड़ा करते तो एक जणा सारी टिकट लेके न कठ्ठी आर टिकट चेकर तै दे दिया करता, आर हाम सारे कठ्ठे बड़ जाते नु करते करते आक फिल्म लिकड़ जागी ताव्ले बड़ जाओ भीतर इतणी वार म वो गिणन नही पाया करता आक टिकट कितणी सै, आर आदमी कीतने सै | न्यू करके हाम ३-४ टिकठ के पिसे बचा लिया करते |
 
मेरा काका कँवल सिंह एर एक घरां में मेरे ताऊ का छोरा हांनिये थे | वे रोहतक कट्ठे सिनेमा देखण जाया करदे | में भी मेरे काका का पुन्झअड़ बणा ऊ की गेल हंडे जाया करदा | ऊ का उने फेदा भी था जब मेरा दादा बुझ्दा अक रे कँवल कित गया था | तो वो जित कहणा चांदा ऊड़े का नाँ ले लेंदा एर मेरे पे हुंकारा भरवा देंदा | वे दो टिकट लेंदे एर एक जणा पहलम मन्ने ले कें ने भीतर चाल्या जांदा | एर फेर माड़ी वार पाछे मूतन का बहाना कर कें बहार आ जांदा एर दुसरे जने नु ले जांदा नु कह कें अक मूतन गए थे | एर जब शो चाल्दा होंदा एर कोए बेटरी ले कें फेर टिकट चेक करदा तो वे मन्ने सीट के तले लूको लेंदे | न्यू कर-कर कें हामने कई पिक्चर देखि |
 
म्हारी गाल में एक छोरी थी ऊ का असली नाँ तो याद कोणी पर उने सांसली कह्या करदे | वा हमेशा धांगन पे लागी रह्या करदी | उनका घर म्हारे घर के सामी -ए पड़े था | उनके घर के साहारे जनरल जंग शमशेर सिंह की तिमाजली हेवेली थी जो घनिये बड्डी थी एर दो भाग में थी(((( जनरल साहेब को ये जंग की उपाधि हेदराबाद को जितने के लिए मिली थी जो की उनकी कमान में जीता गया था, वेसे वे लेफ्टिनेंट जनरल थे , ख़ास बात या थी म्हारी गाल एर गाम खातर एक उसमे सबते उपरला अफसर एर सब तें तरला सिपाही (मेरा बाबू जो नया-नया भारती होया था ) पडोसी थे ))) ) | बीचाले आँगन था | जनरल सहाब ने रीटायेर्मेंट के पाछे रोहतक छोटूराम पार्क धोरे कोठी बना ली थी तो या गाम आली हवेली खाली पड़ी थी | हाम गाल के सारे छोरे मेरे दोस्त नरेंदर हर की हवेली जो तिमाजली थी एर दूसरी ओड ने इस के सहारे-ए लागे थी , की छात पर के इस हवेली में उतर जाया करदे | छोरियां का जाना मना था | उड़े आगले भाग में उनके १५-२० पलंग पड़े थे निवार के जो किबे गेस्ट रूम का काम कर्या करदा एर इब्ब म्हारे बर्ग्याँ के खेलन के काम आया करदा | ई छोरी ने ,जल्दी-बल्दी होई ने ,सारी गाल में अफवाह फेला दी अक रात ने भूतनी हंडे से हवेली माँ के घूंगरू बाँध के एर मन्ने देखि से , वा छत पे सोया करती आपनी ४ भाणा गेल्याँ | मन्ने विरोध कर्या अक सामी हाम छत पे सोवाँ हामने ना सुनदी तेरे-ए घणे कान बाजें सें | पर वा अपनी बात पे अड़ी रही | घन्खरे बालक ऊ की बात ने माने कोणी थे क्योंकि आर्यसमाज की विचारधारा होने के कारण भूत-परेत पे विश्वास कोणी था पर छोटे बालक माडे डरअन लागे | म्हारे गाम में हर साल आर्य समाज का १०-१५ दिन का यगाना होया करदा आर्या समाज मंदिर में ,जी में उस बखत के मशहूर पर्चारक श्री अग्निवेश ,साम्वेश एर इन्दरवेश जी आया करदे( पाछे इन्दार्वेश जी जब मुंबई आया करदे तो मेरे धोरे या आर्या समाज फोर्ट में रूक्या करदे ) उड़े में म्हारी गाल के सारे बालकां नु घेर -घोट कें ले जाया करदा एर उनके गले में जेवड़ी (जनेवू) घलवा के ले आंदा | १०-१५ दिन तो सब नियमानुसार चाल्दे एर फेर गाल्म-गालां (गधा कित लोटे ?,कूरडीयाँ पे ! ) | वा नु बोली अक जित भूत रह्या करें ऊडे चक्चुन्दर भी रह्या करें | उस हवेली में कई हजार चक्चुन्दर रह्या करदे एर रात नु आसमान में चढ़ कें गोल-गोल घूम्या करदे | मेरी ,सुरेंदर एर नरेंदर की तिकड़ी थी हामने पलान बनाई अक या कुकर सुधारी जा ,किम्मे समझ में कोणी आया | तो हामने डरआन की पलान बनाई एर दिन में एक खाली पीपा घूँघरू घाल कें एर जेवड़ी के साहरे हवेली के पाछले भाग में भीतर दुकडिया में ई ढाल लटका दिया अक किस्से ने दिखे कोणी एर जेवड़ी खींच के ने हामने नरेंदर हर के चुबारे में बाँध दी | रात होई एर १०-११ बजे सी हामने जेवड़ी खींचनी सुरु कर दी | पीपा भींत के लागे तो धम्म-धम्म की वाज आवे एर घूँघरू बाजें | वे चारुं भान एर उनकी माँ २ मिनट में उपरा तली पड्काले माँ के गधड-मध्अड़ तले पाई | फेर तो वा छोरी एर ऊ की भान छात पे जांदी भी डरदी एर हेली के आगे के लिकड़ दी भी डरदी | एर हाम तो नुई खेले गए हेली में भूतां की गेल चक्चुन्दर पकड़ दे | घणा लाम्बा किस्सा हो ग्या |
 
म्हारी गाल में एक छोरी थी ऊ का असली नाँ तो याद कोणी पर उने सांसली कह्या करदे | वा हमेशा धांगन पे लागी रह्या करदी | उनका घर म्हारे घर के सामी -ए पड़े था | उनके घर के साहारे जनरल जंग शमशेर सिंह की तिमाजली हेवेली थी जो घनिये बड्डी थी एर दो भाग में थी(((( जनरल साहेब को ये जंग की उपाधि हेदराबाद को जितने के लिए मिली थी जो की उनकी कमान में जीता गया था, वेसे वे लेफ्टिनेंट जनरल थे , ख़ास बात या थी म्हारी गाल एर गाम खातर एक उसमे सबते उपरला अफसर एर सब तें तरला सिपाही (मेरा बाबू जो नया-नया भारती होया था ) पडोसी थे ))) ) | बीचाले आँगन था | जनरल सहाब ने रीटायेर्मेंट के पाछे रोहतक छोटूराम पार्क धोरे कोठी बना ली थी तो या गाम आली हवेली खाली पड़ी थी | हाम गाल के सारे छोरे मेरे दोस्त नरेंदर हर की हवेली जो तिमाजली थी एर दूसरी ओड ने इस के सहारे-ए लागे थी , की छात पर के इस हवेली में उतर जाया करदे | छोरियां का जाना मना था | उड़े आगले भाग में उनके १५-२० पलंग पड़े थे निवार के जो किबे गेस्ट रूम का काम कर्या करदा एर इब्ब म्हारे बर्ग्याँ के खेलन के काम आया करदा | ई छोरी ने ,जल्दी-बल्दी होई ने ,सारी गाल में अफवाह फेला दी अक रात ने भूतनी हंडे से हवेली माँ के घूंगरू बाँध के एर मन्ने देखि से , वा छत पे सोया करती आपनी ४ भाणा गेल्याँ | मन्ने विरोध कर्या अक सामी हाम छत पे सोवाँ हामने ना सुनदी तेरे-ए घणे कान बाजें सें | पर वा अपनी बात पे अड़ी रही | घन्खरे बालक ऊ की बात ने माने कोणी थे क्योंकि आर्यसमाज की विचारधारा होने के कारण भूत-परेत पे विश्वास कोणी था पर छोटे बालक माडे डरअन लागे | म्हारे गाम में हर साल आर्य समाज का १०-१५ दिन का यगाना होया करदा आर्या समाज मंदिर में ,जी में उस बखत के मशहूर पर्चारक श्री अग्निवेश ,साम्वेश एर इन्दरवेश जी आया करदे( पाछे इन्दार्वेश जी जब मुंबई आया करदे तो मेरे धोरे या आर्या समाज फोर्ट में रूक्या करदे ) उड़े में म्हारी गाल के सारे बालकां नु घेर -घोट कें ले जाया करदा एर उनके गले में जेवड़ी (जनेवू) घलवा के ले आंदा | १०-१५ दिन तो सब नियमानुसार चाल्दे एर फेर गाल्म-गालां (गधा कित लोटे ?,कूरडीयाँ पे ! ) | वा नु बोली अक जित भूत रह्या करें ऊडे चक्चुन्दर भी रह्या करें | उस हवेली में कई हजार चक्चुन्दर रह्या करदे एर रात नु आसमान में चढ़ कें गोल-गोल घूम्या करदे | मेरी ,सुरेंदर एर नरेंदर की तिकड़ी थी हामने पलान बनाई अक या कुकर सुधारी जा ,किम्मे समझ में कोणी आया | तो हामने डरआन की पलान बनाई एर दिन में एक खाली पीपा घूँघरू घाल कें एर जेवड़ी के साहरे हवेली के पाछले भाग में भीतर दुकडिया में ई ढाल लटका दिया अक किस्से ने दिखे कोणी एर जेवड़ी खींच के ने हामने नरेंदर हर के चुबारे में बाँध दी | रात होई एर १०-११ बजे सी हामने जेवड़ी खींचनी सुरु कर दी | पीपा भींत के लागे तो धम्म-धम्म की वाज आवे एर घूँघरू बाजें | वे चारुं भान एर उनकी माँ २ मिनट में उपरा तली पड्काले माँ के गधड-मध्अड़ तले पाई | फेर तो वा छोरी एर ऊ की भान छात पे जांदी भी डरदी एर हेली के आगे के लिकड़ दी भी डरदी | एर हाम तो नुई खेले गए हेली में भूतां की गेल चक्चुन्दर पकड़ दे | घणा लाम्बा किस्सा हो ग्या |

ना इबे कित लम्बा होया है इबे तो बस बीस पन्ने भरे हैं इब ताहि तो गाम गुहान्द के किस्से होए हैं तेरे मामा आर बुआ आले गाम तो रह ए रहे हैं फेर उनके गाम गुहान्द फेर उनके
 
ना इबे कित लम्बा होया है इबे तो बस बीस पन्ने भरे हैं इब ताहि तो गाम गुहान्द के किस्से होए हैं तेरे मामा आर बुआ आले गाम तो रह ए रहे हैं फेर उनके गाम गुहान्द फेर उनके

bhai rakesh dukhi mannyaa ho, me samjhu su yaa teri kheej se , tu punjhad koni laa paandaa naa jayaa tein.
 
बांगड़ टाकिज धोरे महारा मकान बने था रोहतक में | उड़े रात नु सोवन की मेरी ड्यूटी ला दी मेरे बाबू ने २ मिन्हा ताहि इन्ने मकान ना बन लिया | तो में एक्ला पड़्या -पड्या के रूखाल करूँ था | उड़े टाकिज मे हांडअन चाला जांदा कड़े कदाऊ टेम पास कारन खातर | कई दिन पाछे मन्ने बेरा पाट्या अक फिलम सुरु होए पाछे गेट कीपर १५-२० मिनट में-ए हट जाया करदे खासकर आखरी शो में | एर घन्खरे बॉक्स खाली रह्या करदे | जब गेट कीपर चाले जांदे तो में किस्से हो खाली बॉक्स में बड के ने फिलम देख लेंदा| नु कर के मन्ने २-३ फिलम देख ली मुफ्त में | एक दिन इस्सा होया अक हाल्फ टाइम के भी १०-१५ मिनेट पाछे एक जोड़ा आया एर गेट कीपर ने वे, जिस बॉक्स में में लुक कें बेठा फिलम देखूं था ,ऊ में बाड़ दिए | ( ऊँ भी हाल्फ टाइम पाछे फिलम देखन का के मतलब होया )| वे तो मन्ने देख कें ने उलटे हो लिए एर गेट कीपर बुला लिया अक आड़े तो कोए छोरा पहलम-ए बेठा से | गेट कीपर ने में पकड़ लिया एर नु बोल्या तन्ने में बाँध के बिठाऊंगा एर काल थारे घरक्याँ ने बुलाऊंगा | तू नु बता कित्का से | में नु बोल्या में तो महम धोरे का सूँ एर घर तें भाज कें आर्या सूँ , महारा कोए घर का कोणी आवे | तो माड़ी वार तो उन्ने में बिठाए राख्या फेर दुसरे गेट कीपर ने ऊ ताहि सलाह दी अक यो सर हो जाया गा इने जावन दे | एर उने में छोड़ दिया | में तो डाकयाँ आया | पर फेर टाकिज कानी कोणी गया |
 
Ek be mahaare gaam me panchaayat ne चायत ने अंटे (कंचे ) खेलन पे पर्तिबंध ला दिया एर जो बालक पकड्या गया उनके घरक्याँ ने १०० रपिये देने पड़ेंगे | क्योंकि कई केस लगातार इस्से होए अक कई छोटे-छोटे बालक मेडिकल में ले जाने पड़े थे | वे अंटे निगल गे थे | में अंटीआं का कोए ख़ास खिलाड़ी ना था | मेरे दोस्त मेरे अंटे जिब्बे जीत लिया करदे | पंचायत ने बालकां के अंटे खोश-खोश के एर कूयां में गेर दिए | म्हारे स्कूल में भी एक कूई थी एर पंचातियाँ ने स्कूल में आके एक दिन बालकां के बस्त्याँ का झाड़ा लिया एर कई हजार अंटे थाए | वे सारे भी ऊ स्कूल आली कुई में गेर दिए | वा कुई घनी डून्घी ना थी , ऊ में बस ५-६ फीट पानी था | एक दिन हाम ५-६ दोस्ताँ ने पलान बनाई अक इब्ब ते खेलन ना देंदे ,पर किब्बे तो साल, दो साल पाछे खेलन ने मिलेअगा | म्हारे माँ तें एक जणा नेजु-बाल्टी ले आया | इब्ब तले उतरे कूण?, में बोल्या, मन्ने तरणा आवे से में उतर ज्यां गा, पर मने आधे अंटे चाहिए | तरना तो सारयां ने-ए आवे था ,पर डरें थे | २५% पे समझोता होग्या | में तले उतर कें एर बाल्टी में ग्यार एर अंटे एर और किम्मे अडंगा जो भी था भर-भर कें ने उप्पर खंदा दिया | मेरे हिस्से में ४००-५०० अंटे आये | में कदे अंटे मोल ले के नि खेल्या | किते पड़े पागे तो खेल लिया , ना तो ना सी | ७-८ मिन्हा पाछे सहज-सहज बालक फेर खेलन लागे | में भी कई मिन्हे फेर उन् मुफ्त के अंटया तें खेल्या |
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