एक महारा इंस्टेकटर था अन.सी.सी का , रामकारन सिंह | वो राजस्थान का था | उस का रेंक था मास्टर चीफ का (आर्मी के सूबेदार मेजोर के बराबर)| ऊँ तो ठीक था, पर आपने आप नु जाट बतांदी हाण हिच्कया करदा | महारा एक और इंस्टेकटर था ,सकुबा डाइविंग का, हिरन कूदने धोरे का, टोकस | उने बताई अक यो जाट स | इब्ब हाम नए-नए गाम तें बाहर आये ,तो कोए जाट भाई मिलजा ,या गाम आला कोए मिल्जा तो घणे राजी होया करदे | यो रामकरण सारी हाण नाक में आंगली राख्या करदा | एर मुस्से काढअन्न का बड़ा शोकिन था | बेरा ना ऊह के नाक में के कुरड़ी पड़ी थी ,ख़तम-ए कोणी होया करदे | एक दिन मन्ने बुझ ली ,अक सर जी ,आप जाट सो के ? वो नाट गया ,एर नु बोल्या ,अक चुप-चाप आपना काम कर, के जाट-जूट ला राखी स | में नु बोल्या ,सर जी , मन्ने भी इस्सा-ए लागे था ,अक सारी हाण मुस्से काढानिया जाट कुकर हो सके स | ऊह के निरा छो उट्ठया | एर न्यू बोल्या ,अक तू घंणी बक -बक करे स ,एर मेरे ताहि फरोग जम्प(मिन्ड़क की ढाल कूद-कूद कें चालणा ) दे दिया | आधा घंटे में मेरी टांग टूट ली | पर रामकरण ने मुस्से काढने बंद कर दिए | खासकर जब वो हामने परेड करवान आंदा जब | सुरडा जाट |
Ravider ji katii kamal kar diya aapne toh....Surredra jat....haha...ghane din baad yo word padhyaa se