albaadi baalkaan key kissey.

एक महारा इंस्टेकटर था अन.सी.सी का , रामकारन सिंह | वो राजस्थान का था | उस का रेंक था मास्टर चीफ का (आर्मी के सूबेदार मेजोर के बराबर)| ऊँ तो ठीक था, पर आपने आप नु जाट बतांदी हाण हिच्कया करदा | महारा एक और इंस्टेकटर था ,सकुबा डाइविंग का, हिरन कूदने धोरे का, टोकस | उने बताई अक यो जाट स | इब्ब हाम नए-नए गाम तें बाहर आये ,तो कोए जाट भाई मिलजा ,या गाम आला कोए मिल्जा तो घणे राजी होया करदे | यो रामकरण सारी हाण नाक में आंगली राख्या करदा | एर मुस्से काढअन्न का बड़ा शोकिन था | बेरा ना ऊह के नाक में के कुरड़ी पड़ी थी ,ख़तम-ए कोणी होया करदे | एक दिन मन्ने बुझ ली ,अक सर जी ,आप जाट सो के ? वो नाट गया ,एर नु बोल्या ,अक चुप-चाप आपना काम कर, के जाट-जूट ला राखी स | में नु बोल्या ,सर जी , मन्ने भी इस्सा-ए लागे था ,अक सारी हाण मुस्से काढानिया जाट कुकर हो सके स | ऊह के निरा छो उट्ठया | एर न्यू बोल्या ,अक तू घंणी बक -बक करे स ,एर मेरे ताहि फरोग जम्प(मिन्ड़क की ढाल कूद-कूद कें चालणा ) दे दिया | आधा घंटे में मेरी टांग टूट ली | पर रामकरण ने मुस्से काढने बंद कर दिए | खासकर जब वो हामने परेड करवान आंदा जब | सुरडा जाट |

Ravider ji katii kamal kar diya aapne toh....Surredra jat....haha...ghane din baad yo word padhyaa se
 
जुकर मन्ने पाछली पोस्ट(अल्बाद ) में लिखा था रामकरण सिंह के बारे में | एक बे महारा अन.सी.सी. का केम्प लाग्णा था, एर यो ,सुर्डा जाट इंचार्ज था | यो तडके-तड़क आग्या ,थ्री टन(आर्मी का बड्डा ट्रक ) गाडी ले कें ,म्हारे होस्टल में | सब ने आपने सूटकेश एर झोले गेरने सुरु कर दिए ऊह गाड्डी में | जब में बेठन आया ,तो उने रोक दिया | नु बोल्या "ये क्या नाईट शूट पहन राख्या हे"| में गाम मा तें पठाणी सिमवा के लेगया था ,जब सी -क पठाणी का घणा रिवाज था | बाकी सब तो कोए, पेंट पहर रया था एर कोए निकर टी -शर्ट | इब्ब ताहि मन्ने २ साल हो लिए थे आड़े, एर सब के बारे में जाणकारी हो री थी | मन्ने नु बेरा था ,अक यो मेरे पे ,किम्मे दिसिप्लेनारी एक्सन तो ले नि सकदा ,मेरा के पाड़ ले गा | ऊँ भी में ऊह तें चिड रया था | वो आपना जाट होना लुकोया करदा, चमारां की ढाल | में नु बोल्या ,बावली बूच, इन्हें पहर के तो में सुस्राड़ तें बहु ले आऊँ,( ऊँ जब ताहि मेरा बियाह ना होया था ) एर तू मन्ने ट्रक में चढ़अण तें नाटे | एर तेरी या ड्रेस, जो तू पहर रया ,या मेली होरी पहलम इन्हें धो ले, एर फेर मेरे ताहि किम्मे कहिये | मेरा पठानी कम तें कम प्रेस क्रेहोड़ा ,धोया होड़ तो स | मन्ने या बात सब केडेटआँ के सामी कह दी | ऊह का मुंह देखण जोगा था | वो आई बरियाँ ,मेरे तें उम्र में घणा बड्डा होने के बावजूद मात खा जाया करदा | फेर जब पाछे उने मेरे तें बचणा सुरु कर दिया |
 
मेरी मोशेरा भाई मनीष दहिया भोत घना हंसोकडा स | ऊह की एक आदत थी अक वो रह चाल्दी जवान छोरियां नु एर लूगाइयां नु "नमस्ते ताई" कह कें लिकड़ जाया करदा | एक बे वो म्हारे गाम में आर्या था | हाम म्हेंश जोहड़ पे ले जावां थे | आगे-आगे एक छोरी जा थी | वो ऊ ताहि बोल्या ताई हट ले ने | ऊह छोरी ने ऊह के ताशला मार्या बागा कें | एर लागी गाल बकण | मनीष दुडकी गया |
 
जुकर मन्ने पाछली पोस्ट(अल्बाद ) में लिखा था रामकरण सिंह के बारे में | एक बे महारा अन.सी.सी. का केम्प लाग्णा था, एर यो ,सुर्डा जाट इंचार्ज था | यो तडके-तड़क आग्या ,थ्री टन(आर्मी का बड्डा ट्रक ) गाडी ले कें ,म्हारे होस्टल में | सब ने आपने सूटकेश एर झोले गेरने सुरु कर दिए ऊह गाड्डी में | जब में बेठन आया ,तो उने रोक दिया | नु बोल्या "ये क्या नाईट शूट पहन राख्या हे"| में गाम मा तें पठाणी सिमवा के लेगया था ,जब सी -क पठाणी का घणा रिवाज था | बाकी सब तो कोए, पेंट पहर रया था एर कोए निकर टी -शर्ट | इब्ब ताहि मन्ने २ साल हो लिए थे आड़े, एर सब के बारे में जाणकारी हो री थी | मन्ने नु बेरा था ,अक यो मेरे पे ,किम्मे दिसिप्लेनारी एक्सन तो ले नि सकदा ,मेरा के पाड़ ले गा | ऊँ भी में ऊह तें चिड रया था | वो आपना जाट होना लुकोया करदा, चमारां की ढाल | में नु बोल्या ,बावली बूच, इन्हें पहर के तो में सुस्राड़ तें बहु ले आऊँ,( ऊँ जब ताहि मेरा बियाह ना होया था ) एर तू मन्ने ट्रक में चढ़अण तें नाटे | एर तेरी या ड्रेस, जो तू पहर रया ,या मेली होरी पहलम इन्हें धो ले, एर फेर मेरे ताहि किम्मे कहिये | मेरा पठानी कम तें कम प्रेस क्रेहोड़ा ,धोया होड़ तो स | मन्ने या बात सब केडेटआँ के सामी कह दी | ऊह का मुंह देखण जोगा था | वो आई बरियाँ ,मेरे तें उम्र में घणा बड्डा होने के बावजूद मात खा जाया करदा | फेर जब पाछे उने मेरे तें बचणा सुरु कर दिया |

bhai jee se aage, ess raam karan ke aur bi kisse adh ki lya
 
में ,मेरे काका कँवल सिंह की गेल-गेल हंडे जाया करदा | वो आपणे साइकल पे ,आगे बालकां आली काठी भी लुवार्या था | फेर ऊह का बियाह होगा | उन्हें वा बालकां आली काठी तार बगाई, एर आगले हेंडल पे चादर लपेट के ,मेरी काकी नु बेठा ले जांदा | में मेरी काकी तें चीडअंन लाग्या था | मेरे दादा ने वे दोनु पति- पत्नी बाजरा चूंडअन खंदा दिए खेताँ में | वे साबत दिन में दोनु २०-ए अक पुली चुंड कें आये| ऊँ तो एक बन्दे ने लगभग ८०-९० या १०० पूळी चुंडअणि चाहिए थी | आगले दिन मेरे दादा ने, में गेल्याँ खंदा दिया, मेरे काका की | एर मेरा दादा नु बोल्या अक बोढिया घर का काम कर कें ,पाछे रोटी ले आवेगी | इतनी मेरी काकी कल्लेवार सी आई ,रोटी ले कें इत्ने हाम ने ८०-९० पूळी चूंड दी ,जब ये बात मेरे समझ में ना आई ,पर बड्डा होयें पाछे सम्झ्या, अक बुड्ढ़े ने दिमाग तें काम लिया था | वे रोटी खाएं पाछे फेर अल्बाद घणी करदे, एर काम कम | एर जब भी लिंडा (दो मुँही शीर्टी )आंदा तो दोनु मेरे-ए देंदे | इस कारण में उन्तें और चिड गया | फेर घरां जांदी हान, मेरा काका आपनी बन्नो ने तो साइकल पे बिठा ले जांदा (पाछली शीट पे कोए भरोटा वगेरा होया करदा) एर मन्ने नु कहंदे ,अक तू या ताशली ठा ल्या (ऊह में कटोरदान एर षीत की डोली भी होया करदी )एर में ७-८ साल का था जब ,एर म्हारे खेत पड़्या करदे गाम तें साढ़े तीन की.मी.| घर ताहीं में होया रेंदा लटएम - लोरी ,काशना की गेल्याँ | २-३ दिन में, में दुखी हो लिया | एक दिन में जंगल होवण के बहाने गया, एर कोठड़े में खड़े ऊह साइकल की फूंक काढ आया | कोठड़ा(खेताँ में बणाया होया एक या दो कमरे का घर ) चार-पांच किल्ले दूर था | जब सांझ सी के हाम घरां चाले तो साइकल में फूंक कोणी | इब्ब सारयां नु पहयाँ जाणा पड़्या | ताशली मेरी काकी ने ले ली | एर में मटकता चाल्या उनके पाछे-पाछे | ऊह दिन में नर्या राजी होया |
 
साईकिल की बात पर एक छोटा सा अल्बाद का किस्सा मुझे भी याद आया I मैं दशवीं कक्षा में था और हाई स्कूल हमारे गाँव से ४-५ किलोमीटर दूर दूसरे गाँव में था इसलिए हम कुछ लड़के साईकिल पर जाया करते थे. कभी कभी जब पढने का मन नहीं होता तो हम तीन चार अल्बादी बालक तफरी (recess ) के बाद क्लास bunk कर देते आर अपनी अपनी साईकिल उठा के भाज लिया करते I बड़ी क्लास थी 45 बालक थे आर मास्टर भी घने serious ना थे I पर एक दिन एक शास्त्री जी (संस्कृत teacher ) की निगाह मैं चढ़ गे I उसका मेरे पै शक गया आर बोल्या अच्छा तो तूं है इनका रिंग लीडर I थोड़े दिन भाजना बंद कर दिया पर जब बात पुराणी होगी तो फेर सिलसिला शुरू होग्या I मारण तै उसनें दर लाग्गै था क्योंकि एक तो मैं मास्टर का छोरा था आर पिता जी नै सारे मास्टर जानते थे आपस की लिहाज मैं पिटाई कम होती थी. दूसरा पढाई मैं भी मैं अंधों में काना राजा था I तीसरा कारण यो था कि एक दिन एक छोरे नैं headmaster का कालर पकड़ लिया था क्लास मै. सारे मास्टर डर गे थे उस दिन पाछे, पर वो शास्त्री थोडा दबंग था I एक दिन वो शाश्त्री म्हारी सब क़ी साईकिल की chain पर ताले ठोक आया पड़ोस के एक घर में जहाँ हम साईकिल कड़ी करा करते. हमने देखा क़ी ताला इस ढंग से लगा राख्या था क़ी chain का आधा circle लग सके था यानि चेन को आधा घुमाओ और फेर उल्टा घुमा दो I न्यू आधी चेन घुमाते घुमाते हम घर पहुँच गे आर सीधे लुहार के घर जाके वो सारे ताले कटवा लिए. अगले दिन prayer में सबसे पहले मेरी पेशी हुई I शाश्त्री नै गुस्सा नहीं आया आर बोल्या बालको आज मैं आपकी मुलाकात एक ऐसे genious से करवाने जा रहा हूँ जिससे आप स्कूल से भागने के गुर सीख सकते हो. फेर शास्त्री न्यू बोल्या भले आदमी एक तो न्यू बतादे आक तूं साईकिल नैं 5 किलोमीटर सर पे उठाके किस तरह ले के गया, आर दूसरा मेरे ताले वापिस कर दे. मैं मासूम सा बन के बोल्या जी ताले कौनसे. फेर हांसी आगी उसने भी आर मन्ने भी और हमने उसको समझाया क़ी अगली बार ताला कैसे लगाना है साईकिल को .

थोड़े दिन बाद तो अल्बाद क़ी इंतिहा कर दे म्हारी क्लास नै. हमारी कक्षा के कुछ दबंगों ने उसी शास्त्री के बहकावे में आकर Headmaster के सर पर चादर पर ड़ाल के मुंह ढक के बेचारे क़ी पिटाई कर दी I मैंने काफी विरोध किया इस घिनोने कार्य का लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी. पुलिस आई और उस शास्त्री जी ने मुझे धमकी दी क़ी अगर तू गवाही देगा तो तेरे खिलाफ भी मैं गवाही दिलवा दूंगा. DSP enquiry पर आया और गाँव क़ी पंचायत ने मामला रफा दफा करवा दिया ताकि बच्चों का भविष्य बर्बाद ना हो.

ऐसे अल्बादी थे म्हारे स्कूल के बालक. Exam में 45 में से हम 11 बच्चे ही पास हुए थे I
 
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साईकिल की बात पर एक छोटा सा अल्बाद का किस्सा मुझे भी याद आया I मैं दशवीं कक्षा में था और हाई स्कूल हमारे गाँव से ४-५ किलोमीटर दूर दूसरे गाँव में था इसलिए हम कुछ लड़के साईकिल पर जाया करते थे. कभी कभी जब पढने का मन नहीं होता तो हम तीन चार अल्बादी बालक तफरी (recess ) के बाद क्लास bunk कर देते आर अपनी अपनी साईकिल उठा के भाज लिया करते I बड़ी क्लास थी 45 बालक थे आर मास्टर भी घने serious ना थे I पर एक दिन एक शास्त्री जी (संस्कृत teacher ) की निगाह मैं चढ़ गे I उसका मेरे पै शक गया आर बोल्या अच्छा तो तूं है इनका रिंग लीडर I थोड़े दिन भाजना बंद कर दिया पर जब बात पुराणी होगी तो फेर सिलसिला शुरू होग्या I मारण तै उसनें दर लाग्गै था क्योंकि एक तो मैं मास्टर का छोरा था आर पिता जी नै सारे मास्टर जानते थे आपस की लिहाज मैं पिटाई कम होती थी. दूसरा पढाई मैं भी मैं अंधों में काना राजा था I तीसरा कारण यो था कि एक दिन एक छोरे नैं headmaster का कालर पकड़ लिया था क्लास मै. सारे मास्टर डर गे थे उस दिन पाछे, पर वो शास्त्री थोडा दबंग था I एक दिन वो शाश्त्री म्हारी सब क़ी साईकिल की chain पर ताले ठोक आया पड़ोस के एक घर में जहाँ हम साईकिल कड़ी करा करते. हमने देखा क़ी ताला इस ढंग से लगा राख्या था क़ी chain का आधा circle लग सके था यानि चेन को आधा घुमाओ और फेर उल्टा घुमा दो I न्यू आधी चेन घुमाते घुमाते हम घर पहुँच गे आर सीधे लुहार के घर जाके वो सारे ताले कटवा लिए. अगले दिन prayer में सबसे पहले मेरी पेशी हुई I शाश्त्री नै गुस्सा नहीं आया आर बोल्या बालको आज मैं आपकी मुलाकात एक ऐसे genious से करवाने जा रहा हूँ जिससे आप स्कूल से भागने के गुर सीख सकते हो. फेर शास्त्री न्यू बोल्या भले आदमी एक तो न्यू बतादे आक तूं साईकिल नैं 5 किलोमीटर सर पे उठाके किस तरह ले के गया, आर दूसरा मेरे ताले वापिस कर दे. मैं मासूम सा बन के बोल्या जी ताले कौनसे. फेर हांसी आगी उसने भी आर मन्ने भी और हमने उसको समझाया क़ी अगली बार ताला कैसे लगाना है साईकिल को .

थोड़े दिन बाद तो अल्बाद क़ी इंतिहा कर दे म्हारी क्लास नै. हमारी कक्षा के कुछ दबंगों ने उसी शास्त्री के बहकावे में आकर Headmaster के सर पर चादर पर ड़ाल के मुंह ढक के बेचारे क़ी पिटाई कर दी I मैंने काफी विरोध किया इस घिनोने कार्य का लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी. पुलिस आई और उस शास्त्री जी ने मुझे धमकी दी क़ी अगर तू गवाही देगा तो तेरे खिलाफ भी मैं गवाही दिलवा दूंगा. DSP enquiry पर आया और गाँव क़ी पंचायत ने मामला रफा दफा करवा दिया ताकि बच्चों का भविष्य बर्बाद ना हो.

ऐसे अल्बादी थे म्हारे स्कूल के बालक. Exam में 45 में से हम 11 बच्चे ही पास हुए थे I



vp ji aap to ibbi bhi albaadi ho ,saarey thredaan pe albaad kar aawo so.
 
महारा गाम घणा बड्डा स | गाम में चमारां के भी १५०-२०० घर होंगे | एर उनका तो गाम तें लिकड़माँ एक नय्यारे गाम की ढाल बस्ती स | तीन चार चमारां के घर इससे सें, अक वे साझे बाधे की जमीन बोंदे-बोंदे ट्रेक्टर ले लिए, एर आपणे आप नु भी जमीदार समझण लागे | उन् ट्रेक्टर आल्यां माँ तें एक के छोरे का बियाह था | उन् ने घोड़चडी सारे गाम माँ के काढअण की पलान बंनाई | ऊँ वे आपणे-आपणे बस्ती माँ के काढ्या करदे | गाम के चारुं ओड़ के घोड़ चढ़ी काढअण में ऊँ तो ३-४ घंटे लाग्जाया करदे | घोड़ चढ़ी का रूट लगभग चार या पांच की.मी. का पड़े था | उन् ने दोफारी में घोड़ चढ़ी काढी(वेसे शाम के टेम घोड़ चढ़ी काढअण का रिवाज स ) ,जब घन्खरे मरद माणस गाम तें बाहर हों सें | ये भाजते-भाजते आवण लागरे | पाछे-पाछे रोला माच रया | आगे दो-तीन बीन बाजे आले एर पाछे कोए लुगाई भी कोणी थी जुकर घोड़ चढ़ी की गेल होया करें गीत गावन आली | हाम १०-१२ कूंगर ठाली बेठे थे एक घेर में | हाम ने रोला सा सूना ,एक रे घेर लो ,घेर लो ,चमार घोड़ चढ़ी काढ ले गे |जब म्हारी गाल में आ लिए, तो हाम ने उन के ट्रेक्टर के आगे रह्डू- गाडी अड़ा दिए | एर वे उलटा बेक करण की कोशिश कारन लागे तो, हाम ने उड़े भी एक तेथान खड़ी थी, वा आड़ी खड़ी कर दी | इब्ब चमारां की घोड़ चढ़ी ना तो आगे जा सके थी, एर ना पाछे | लड़ वे सकें नि थे | आखिर में उनके छोरे ने पायां जाणा पड़्या वापस, घोड़ चढ़ी अधम छोड़ कें | फेर सांझ सी के उनका ट्रेक्टर ले जावन दिया हाम ने | फेर गाम के माणसआँ ने कही अक बढ़िया काम कर्या बालको | वा म्हारे गाम में चमारां की पहली एर आखरी घोड़ चढ़ी थी | फेर उन् ने कदे हिम्मत नि करी गाम माँ के घोड़ चढ़ी काढअन की |
 
म्हारी गेल स्कूल में एक छोरा पढ्या करदा | ऊह का असली नाँ तो किस्से नु भी ना बेरा था | शायद उनके घर के भूल गे होंगे |सारा गाम एर स्कूल भी उने झाकरा कह्या करदा (झाकरा=मोटा एर बड्डा माटी का बाषण जिह में देशी घी घाल कें धरया करें )| वो था भी भार्या एर गोल मटोल | उह के घणा बड्डा पेट भी लिकड़ रया था | अन्न्मिता खा जाया करदा | हर क्लास २ साल में पास होया करदी उह पे | पास के होया करदी ,धिन्ग्ताने पास कर दिया करदे | वो म्हारे तें ५-६ साल बड्डा था | उह के हानिये बालक दशमी पास कर कें जा लिए थे | जब हाम ७ मी में पढ्या करदे | वो किस्से की सुण्या भी नि करदा | एक दिन एक साश्त्री जी ने वोह खड्या कर दिया ,कयायें बात पे | शास्त्री बड्डी -बड्डी गोज्याँ आला , धोला कुड़ता- पजामा पहर के आया करदा | शास्त्री तें वो बोल्या रे मास्टर तू मेरा के कर दे गा | मास्टर बोल्या तू के कर दे गा | झाकरा बोल्या में तेरी गोझ में मूत दूंगा | सारी क्लास का हान्स हान्स कें पेट फूट गया | शास्त्री के भी छो तो उठ्या, पर उह की भी हांसी छुट गी | एर फेर झाकरे ताहि किस्से नु कुछ नि कही |
 
पहल्डी पोस्ट में मन्ने जिस अन.सी.सी केम्प का जीकर कार्या था ,उस्से में की एक घटना स | एक दिन हाम ने ऑफ़ मिलगा | एर हाम ८-१० जाने घूमन्न चाले गए | उलटे आंदी हाण वार घंणी होगी | जब हाम केम्प में पोंह्चे तो मेस बंद हो लिया था | एर भूखे मरण का हिसाब लागे था | फेर हाम ने देखा ,अक म्हारे इन्स्तेक्टर आपने कमरे में बेठे पीवण लागरे थे | मखा इनका खाणा तो जरूर किते धरया होगा | उनके कमरे में तो किम्मे दिखा कोणी ,हाम ने नु सोची अक मेस में-ए धरया होगा | मेस के एक छोटा सा ताला लाग्र्या था ,एर ना थां की कुण्डी लागरी थी | हाम ने वा पाड़ ली | एर उन् इन्स्त्रेक्त्रआँ खातर धरया होड़ खाणा पहर के, हाम तो जा सोये | पाछे वे हंडे पेट पकडे | आगले दिन सारयां का बक्कल उतर्या | भूखे इन्स्त्रेक्त्रआँ ने म्हारे ताहि सारे बेच ताहि १० की.मी. की चोपाटी पे क्रोस कंट्री ( उबड़-खाबड़ या सड़क की दोड़ ) दे दी | रेतीली चोपाटी पे सब का ममीरा लिकड़ गया | चोपाटी की १० की.मी. की दोड़ ,सड़क की २५ की.मी. की बराबर पड़े स | पर उन ने बेरा कोणी पाटया अक उनका झेद किनके कारण खाली रह्या था |
 
हा हा हा हा हा हा हा इस्सी तो अपने सारे मोडरेटर गेल बन रही है भाई जीसी थारे शास्त्री गेल बनी थी


म्हारी गेल स्कूल में एक छोरा पढ्या करदा | ऊह का असली नाँ तो किस्से नु भी ना बेरा था | शायद उनके घर के भूल गे होंगे |सारा गाम एर स्कूल भी उने झाकरा कह्या करदा (झाकरा=मोटा एर बड्डा माटी का बाषण जिह में देशी घी घाल कें धरया करें )| वो था भी भार्या एर गोल मटोल | उह के घणा बड्डा पेट भी लिकड़ रया था | अन्न्मिता खा जाया करदा | हर क्लास २ साल में पास होया करदी उह पे | पास के होया करदी ,धिन्ग्ताने पास कर दिया करदे | वो म्हारे तें ५-६ साल बड्डा था | उह के हानिये बालक दशमी पास कर कें जा लिए थे | जब हाम ७ मी में पढ्या करदे | वो किस्से की सुण्या भी नि करदा | एक दिन एक साश्त्री जी ने वोह खड्या कर दिया ,कयायें बात पे | शास्त्री बड्डी -बड्डी गोज्याँ आला , धोला कुड़ता- पजामा पहर के आया करदा | शास्त्री तें वो बोल्या रे मास्टर तू मेरा के कर दे गा | मास्टर बोल्या तू के कर दे गा | झाकरा बोल्या में तेरी गोझ में मूत दूंगा | सारी क्लास का हान्स हान्स कें पेट फूट गया | शास्त्री के भी छो तो उठ्या, पर उह की भी हांसी छुट गी | एर फेर झाकरे ताहि किस्से नु कुछ नि कही |
 
इब्ब झाकरा शब्द आग्या, तो मेरे एक बालकपन की घटना याद आगी | में तीन अक साल का होउंगा |(कई मेरी इतनी छोटी उम्र की बातां नु मानदे कोणी ,अक नु कुकर याद रह सकें सें ,पर मेरे याद सें )| मेरी बड्डी दादी मन्ने घणा लाड कर्या कर दी ,जब मेरे दादा हर न्यारे हो लिए थे | वा जांदे-ए , मन्ने रोटी पे आछा घी धर के दे देंदी | में घी का लाड़ा था-ए | एक दिन ऊह की नजर बचा कें, में जा बड्या ओबरे में, जित झाकरा धरया था | थोड़ी वार पाछे टोहम-टोहा होगी ,अक इब्ब तो छोरा इथों-ए था ,कित गया | में ओबरे में मंडर्या था ,कती खालिस घी खावण | आधा बिरान करण लाग्र्या था ,एर सारे हाथ भर राखे थी घी तें | जब पाछे में मेरी बड्डी दादी धोरे जांदा तो ,मेरी दादी मन्ने खावण नु तो भतेरा देंदी ,पर मेरी टांग के जेवड़ी बाँध के१०-१५ फूट की ,एर खाट के पावे के बाँध देंदी | घी चोर पोता |
 
isi ek baat mere bhi yaad aa gi...
mein bhi jab ghana hee chhota tha...jab bolna nahi aata tha...
to jab nani dahi biloya karti... arr fer jab wa hath se maakhaniye ghee ke jab gole se banaya karti (usme se chhachh nikalne k liye), to mein paas jakar hatheli maand k baith jata arr wa ghee ka chhota ka gola meri hatheli par dhar deti..... arr mein usne chaat jata...

bhai jo suwaad us ghee mein tha wo aaj tak kisi aur cheez mein na aaya...
aaj bhi jab nani se milta hun to sabse pehle hum usi baat ko yaad karte hain....

ab na to mein chhota raha aur na hee haath se yun ghee kaadhne ka time raha (sab machine lagaye baithe hain...)

Note: Bhai ya albaad to na thi par kehe bina raha ni gaya... :)
 
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isi ek baat mere bhi yaad aa gi...
mein bhi jab ghana hee chhota tha...jab bolna nahi aata tha...
to jab nani dahi biloya karti... arr fer jab wa hath se maakhaniye ghee ke jab gole se banaya karti (usme se chhachh nikalne k liye), to mein paas jakar hatheli maand k baith jata arr wa ghee ka chhota ka gola meri hatheli par dhar deti..... arr mein usne chaat jata...

bhai jo suwaad us ghee mein tha wo aaj tak kisi aur cheez mein na aaya...
aaj bhi jab nani se milta hun to sabse pehle hum usi baat ko yaad karte hain....

ab na to mein chhota raha aur na hee haath se yun ghee kaadhne ka time raha (sab machine lagaye baithe hain...)

Note: Bhai ya albaad to na thi par kehe bina raha ni gaya... :)

Ghee par to main bhee yaad kar kee bataungaa.

mahrey saath eik pandit thaa. Khud kaa ghee bheeter almaree mein rakhaa kartaa.

Maharey ssathee sports aaley eik deen ghee kaad laaye uskaa chhupkee .

Hum milkeee boley halwaa banaa lo.

Bahmann kamraa mein aagaya.

pahalwan boley arey bahmaneeyaa halwaa banaa dey taney bhee khua daangey.

Bahmaan ney tawlaa tawlaa halwaa banaayaa.

Kamrey mein choree chhepey heater plates rakhee hui thee.
Bahar tey taalaa lagaa deeya kardey aur bheeter maal banaaya kardey.
Warden haand kee chalaa jaayaa kardaa.

Halwaa baneney key baad bhar pet khayaa sab ney

aur

bachaa hua bamaan tai de diya bhai tadkey khaa liye.

bahmaan le gaya.

Tadkey jab mes khatar peepee thaee ghee kee jab bolaa-----------------
 
mein jab udaipur mein padya karta...
to pehli baar chhutti kaat k wapas gaya to maa ne peepa bhar k de diya gooond k laaduan ka... boli roz naasta kar liye... aadha semester to chal jaange...
hum 8 chhore reya karte 4 kamra mein.... ek baaniya, teen baaman, do punjabi, ek pahadi arr ek mein jaat...

ibb bhai goond k laadu dekh ke sab k sab mand gaye...
bole suwaad hai suwaad hai karte karte.. khaye gaye..
mere batte ek week tak kisi ne roti na banayi...
6-7 din baad jab peepa reeta (khali) ho lia tab bole ibb roti banate hain... hahaahha


meri maa phone par poochhe laadu kha liye tame par...
mein bolya maa laadu to jaa liye.. ibb to bus yaadein bachi hain,... hahhahaha
 
मेरे मामा ने जो आर्मी में करनल था, उन्हें रोहतक कमला कालोनी ,माडल टाऊन ,रोहतक में नई-नई कोठी बनाई थी |जब में उनीवरसिटी कोलेज में पढ्या करदा | मेरा मामा बोल्या ,अक तू रोज गाम में आवे जावे ,कोठी पे रह ले ,एर माड़ी दूर कोलेज से ,तेरी पढ़ाई एर ,म्हारी कोठी की रुखाल हो जा गी | वे जांदे-जांदे कोठी के पाछले २ कमरे ,दो हब्ब्शियाँ ताहि किराए पे दे गे | एर मेरे ताहि कह दी अक जो किराया आवे ,उस तें आपणा राशन एर दूध का खर्चा काढ लिए | तो भाइओ में उड़े उन् हब्ब्शियाँ की संगत में ,कोठी एर उन् हब्ब्शियाँ का भी रुखाला रहवन लाग्या | में दोफारे एक बजे कोलेज माँ तैं आ जांदा | माड़ा- मोटा पढ़ लेंदा,एर लान में सब्जी वगेरा ला राखी थी ,उन् में पाणी- पूणी दे कें ,एर बखत तें-ए आपनी रोटी पाथ कें धर देंदा | ये हब्शी कदे-कदे ४-५ जाने कट्ठे हो जांदे | एर कई बे इन् की गेल लूगाई भी होंदी | वे तो उन् ने छोरी कह्या करदे ,पर हाम ने तो कदे उनकी छोरियां में ,एर लूगाइयां में फरक का बेरा-ए ना पाट्टया करदा | सारी मेंह्सया बर्गे पाछ्याँ आली दिखया करदी | जब भूण्ड(ऑटो रिक्सा ) एक आध-ए होया करदा, साइकल रिक्स्सा घणे थे | इनकी एक लुगाई एक रिक्सा में एकली-ए आया करदी | एर रिक्सा च्लावानिया बिहारी के पड़-नानी याद आ जाया करदी, इनने ढोवन में | ये दो हब्ब्शी जो म्हारे किराये दार थे ,वे गेर टेम भोत आया करदे | फेर मन्ने रात नु उठ कें गेट खोलना पड़दा | इनके दोस्त भी रात-बिरात तंग कर्या करदे | म्हारी कोठी के पाछे एक कोठी थी | बीचाले एक पाँच फूट का ओटड़ा था | एर परली कोठी में चार पांच जवान एर सुथरी छोरी रह्या करदी | ये हब्ब्शी छात पे चढ़ के ,उन् पे लाइन मार्या करदे | एर बड़ी बड़ाई करदे, एक थारी छोरी रानियाँ जिस्सी सें | एर वे छोरी भी इस्सा लाग्या करदा ,अक जाणु वे भी राजी हों सें ,उन्तें बकवाद कर कें | एर में उनकी ईह बात तें चिडया करदा | ये हब्ब्शी घने रंगीन लत्ते पहरा करदे | लूगाइयां की ढाल छींट के एर बेल बूटयाँ आले | एर वे आपने लत्ते ओटडे के सहारे एक तार बाँध राख्या था ,ऊह पे सुखाया करदे | इन् छोरियां के घरां दो कुत्ते थे | भार्या-भार्या | इन् हब्ब्शियाँ नु देख कें भोत घणे भोंस्या करदे | एक दिन दोफारी में ,जब ये हब्ब्शी किते जारे थे ,तो मन्ने इनके लत्ते ,उन् कुत्त्याँ कानी बग़ा दिए | कुत्त्याँ की मोज होगी | उन् ने वे लत्ते पाड गेरे ,एर खूब खीलारी करी ल्त्तायाँ की गेल | एर में मूँद के किवाड़ एर मेरे दुसरे मामा के घरां चाला गया झांग कालोनी में,जो के दो की.मी.पे-ए स | जब सांझ सी के आया, तो जो में चाहूँ था वो-ए होया पाया | उन् छोरियां की एर हब्ब्शियाँ की लड़ाई माच री थी | वे आपने लत्त्यां का हर्जाना मांगे थे | फेर उन् छोरियां के बाबू ने वे हब्ब्शी धमकाए ,अक में तमने पुलिस में दे दूंगा | फेर उन् ने छोरियां कानी कदे लाखाण की भी कोशिश ना करी | एर वे छोरी फेर भी उन् हब्ब्शियाँ नु देख देख कें पाट्दी रेंदी | एर में भी हब्ब्शियाँ के सूवाद लेंदा ,अक देख्या ये केवल सुथरी ना सें, उत भी सें | फेर तम इन् गेल बकवाद करोगे तो इब्बके लत्ते तो छोड़ ,आपने कुत्त्याँ पे तमने भी पडवा दे गी |
 
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