prashantacmet
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बेदम तर्क। लोकतंत्र में राजनीतिक दल और नेता जनता के सेवक होते हैं। नरेन्द्र मोदी ने खुद को प्रधान सेवक कहा है। इसका मतलब यह हुआ कि कुछ लोगों के विचारानुसार जो 'ब्राह्मण-बनियों की पार्टी' है भाजपा, उसका समर्थन करने वाले और उसे वोट देने वाले लोग उन चुने गए भाजपा के नेताओं के स्वामी हैं, न कि सेवक। मुस्लिम पैगंबर मोहम्मद के, ईसाई जीसस क्राइस्ट के, बौद्ध गौतम बुद्ध के, सिख गुरु नानक के और आर्यसमाजी मूल शंकर तिवारी उर्फ़ स्वामी दयानंद सरस्वती के गुलाम हैं। हिंदुओं के सिर के ऊपर कोई मालिक नहीं बैठा। इस समस्या का कोई हल नहीं है।
aur aapke to tark hi laughter hai!!!...aur maansik ghulami wala tark padh ke to lot-pot ho jata huin..aap aur aapke chele chahe kitne hi victorious ban le:triumphant:..... .waise mera statement tark nahi tha SATIRE tha..shayd aapki tej khopdi miss kar gayi:angel:........ek baat batao....aapne kaha padha ki nanak aur dayanand ne apne aap ko maalik kaha?..........jaao iska pata lagao apne chelo ke saath!
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