haryanvi boli aur uske anokhe sabad

मुकाण ---|
अपभ्रंश ----यु शबद पंजाबी में घणा अर हरयाणवी में थोड़ा बर्त्या जा स |इह का शाब्दिक अर्थ ख़तम होणा हो स | पर हरयाणा में जब किस्से के मरें पाछे जावे ते न्यू कह्या करें अक मुकाण गए थे | असल में किसे गुजरे होए माणस का जो भी लेण- देण हो ,या जिम्मेदारी हो वा ख़तम कर कें किहे और ताहि दी जाया करदी ,जो भी कुनबे में योग्य हो | ज्यां तें-ए रिश्तेदारी के लोग चून अर और सौदा गेल्याँ ले के जाया करदे क्यूंकि दो तीन दिन रुकक कें अर सारा काम संभलवा कें जब आया करदे |
वाक्य में परयोग--- फूफा की मुकाण जा के आये सां |


रविन्द्र जीत जी राजस्थानी में भी 'मुकाण' का अर्थ यही है कि किसी की मृत्यु हो जाने पर मृत व्यक्ति के परिवार वालों के घर शोक प्रकट करने जाना.

 
Chillamfood ................जब किहे के मोटा लाल गुमड़ा लिक्डावे उह ने "चिलम फोड़ " गुमडा कह्या करें |

Nohra, Pooli, Baithak .................घेर (घेरया होड़ ),नोहरा (नोहेर्या =नवा हेरणा =यानी घेरन्णा ) ,बैठक (जित सारी हाण कोए भी आंनिया जानिया बैठ सके )

Algooja ................. बांसुरी ,

Gthadi ............ गाँठ -अड़ी ,यानी गाँठ बंधी होई |

Baari,Majhak .........बारी शब्द - वारा यानी वायु तें बनया होड़ स | जब क्याहें तेज गति आली चीज पे बेठें तें घणी बाल लागे ते मजा आवे | उह ने बारी लेंणा कह दें सें | मझक शब्द भी मजा लेंने तें बन्न रया स | यानी जिह में मजा आवे वा मझक |

Ghatu,Moghla........................ये दोनु शबद संस्कृत के शबद "गुहा " के अपभ्रंश सें | गुहा ऊँ ते किहे गुफा ने कह दिया करें पर उह का मतलब कोए लाम्बा मोघला या सुरंग हो स | घट्टू =छोट्टा छेद , मोघा =बड़ा छेद |

Ulahna ......... उलाहणा ( शिकायत करन्णा ) ओल्ला आणा यानी घूम के आणा जो किम्मे कर्या स आछा या भुंडा उह का जबाब मिलना | ऊँ ते उल्हान्ना कोए गलत करे होदे काम का-ए आया करे |
 
राजस्थानी में breakfast को "कलेवा' कहते हैं.

कोई मुझे बताएगा कि हरियाणवी में breakfast को क्या बोलते हैं?
 
Chillamfood ................जब किहे के मोटा लाल गुमड़ा लिक्डावे उह ने "चिलम फोड़ " गुमडा कह्या करें |

Nohra, Pooli, Baithak .................घेर (घेरया होड़ ),नोहरा (नोहेर्या =नवा हेरणा =यानी घेरन्णा ) ,बैठक (जित सारी हाण कोए भी आंनिया जानिया बैठ सके )

Algooja ................. बांसुरी ,

Gthadi ............ गाँठ -अड़ी ,यानी गाँठ बंधी होई |

Baari,Majhak .........बारी शब्द - वारा यानी वायु तें बनया होड़ स | जब क्याहें तेज गति आली चीज पे बेठें तें घणी बाल लागे ते मजा आवे | उह ने बारी लेंणा कह दें सें | मझक शब्द भी मजा लेंने तें बन्न रया स | यानी जिह में मजा आवे वा मझक |

Ghatu,Moghla........................ये दोनु शबद संस्कृत के शबद "गुहा " के अपभ्रंश सें | गुहा ऊँ ते किहे गुफा ने कह दिया करें पर उह का मतलब कोए लाम्बा मोघला या सुरंग हो स | घट्टू =छोट्टा छेद , मोघा =बड़ा छेद |

Ulahna ......... उलाहणा ( शिकायत करन्णा ) ओल्ला आणा यानी घूम के आणा जो किम्मे कर्या स आछा या भुंडा उह का जबाब मिलना | ऊँ ते उल्हान्ना कोए गलत करे होदे काम का-ए आया करे |

Yo Chilemfood Admi Ke Leye H ......Eska Matlab Ho S Albadi Balak (Ravinedr Jeet Singh) .....Matlab Jo Kadee Kisee Ke Hooke M Dikda Tod De Kadee Kisee Ka Khuch Nuksan Ker Deee .....................Yo dusra Chilemfood S Admi Ke Leye kehya Gaya S ...............​.
 
राजस्थानी में breakfast को "कलेवा' कहते हैं.

कोई मुझे बताएगा कि हरियाणवी में breakfast को क्या बोलते हैं?

हरयाणा के दक्षिन्णी भागों में "कलेवा "ही कहते हैं और मराठी भाषा में भी यही शबद प्रयोग होता हे नाश्ते के लिए | और कई भागों में मुख्या रूप से मध्या और उत्तरी हरयाणा में पहले "बासोडा " कहते थे यानी बासी खाणा (शाम का बचा हुआ ) परन्तु आज कल ये शबद प्रयुक्त नहीं होता हे | दोपहर के खाने के लिए "जुआरा " कहलाता था यानी जुए के साथ काम करने वालों का खाणा क्यूंकि हरयाणा वासी अधिकतर खेती करते थे और दोपहर का खाणा खेत में ही खाते थे | रात का भोजन शायद "रतोडा " कहलाता था |
 
Yo Chilemfood Admi Ke Leye H ......Eska Matlab Ho S Albadi Balak (Ravinedr Jeet Singh) .....Matlab Jo Kadee Kisee Ke Hooke M Dikda Tod De Kadee Kisee Ka Khuch Nuksan Ker Deee .....................Yo dusra Chilemfood S Admi Ke Leye kehya Gaya S ...............​.

फेर मेरा नाम क्यूँ लेवे स "राकेश सहरावत " का नाम ले |
 
शब्द zameen katna.. mean= bin bat उछल कूद करनाprayog = tu tik ke beth ja, kyu zmeen katan lagra se..
 
दुभात : फरक करणा |
शाब्दिक अर्थ : दू = दो ,भात= चावल , यु शबद एक घटना तें शुरू होया था | जिह में एक बहु आपणे पति तें न्यू दिखा के अक वे एकअ हांडी का बणाया होड़ खाना वा आपणे आंधे सासू -सुसरे तांही भी खुवावे स | पर असल में वा एक हांडी में दो भाग बणवा री थी अर आपणे सासू सुसरे ताहि भुंडा खाणा दिया करदी |
वाक्य में परयोग : मेरी दादी मेरे अर मेरी बेबे में दुभात करे स |
 
दुभात : फरक करणा |
शाब्दिक अर्थ : दू = दो ,भात= चावल , यु शबद एक घटना तें शुरू होया था | जिह में एक बहु आपणे पति तें न्यू दिखा के अक वे एकअ हांडी का बणाया होड़ खाना वा आपणे आंधे सासू -सुसरे तांही भी खुवावे स | पर असल में वा एक हांडी में दो भाग बणवा री थी अर आपणे सासू सुसरे ताहि भुंडा खाणा दिया करदी |
वाक्य में परयोग : मेरी दादी मेरे अर मेरी बेबे में दुभात करे स |

Bhat matlab bhanti = prakar = tarah = types
 
बूढ़े नु कहंदे सुने "ऊत्त का घसा ''

इसका के मतबल होवे स ,,,,
 
बूढ़े नु कहंदे सुने "ऊत्त का घसा ''

इसका के मतबल होवे स ,,,,

घस्सा मतलब ज्युकर रंदा होया करे | रंदा ते एक ओजार हो स पर न्यू-ए जा रग़डा हाथ तें मारे उहने घस्सा कह्या करें अर मुट्ठी भींच के मारे उह ने घुंस्सा कह्या करें | इह का मतलब यु हो सके स अक "उत का रग़डया होया" या "उत का चेला "|
 
घस्सा मतलब ज्युकर रंदा होया करे | रंदा ते एक ओजार हो स पर न्यू-ए जा रग़डा हाथ तें मारे उहने घस्सा कह्या करें अर मुट्ठी भींच के मारे उह ने घुंस्सा कह्या करें | इह का मतलब यु हो सके स अक "उत का रग़डया होया" या "उत का चेला "|

घस्सा ka matlab to yu bhi hoya karee ke jhooth bolna... Jyukar nyu keh diya karein... "Kyun Ghasse Pelai sai bhai" ;)
 
घस्सा मतलब ज्युकर रंदा होया करे | रंदा ते एक ओजार हो स पर न्यू-ए जा रग़डा हाथ तें मारे उहने घस्सा कह्या करें अर मुट्ठी भींच के मारे उह ने घुंस्सा कह्या करें | इह का मतलब यु हो सके स अक "उत का रग़डया होया" या "उत का चेला "|

kaade nyu ho..उत ka jhooth ;)
 
kaade nyu ho..उत ka jhooth ;)

म्हारे ते "धस्से मारणा " कहया करें | पर ये शबद नोर्मल झूठ की बजाय जब परयोग करे जाया करें जब कोए लांबी लांबी हांके जिन्न पे भरोसा ना करया जा सके |
 
म्हारे ते "धस्से मारणा " कहया करें | पर ये शबद नोर्मल झूठ की बजाय जब परयोग करे जाया करें जब कोए लांबी लांबी हांके जिन्न पे भरोसा ना करया जा सके |

haan wo e..haankna(Jhooth Bolna Type)..धस्से haankna.. ek e matlab sai..

P.S: Jyukar Rakesh ajayab gaam ke धस्से haanke ja sai aurran kai aage ;)
 
हरयाणा के दक्षिन्णी भागों में "कलेवा "ही कहते हैं और मराठी भाषा में भी यही शबद प्रयोग होता हे नाश्ते के लिए | और कई भागों में मुख्या रूप से मध्या और उत्तरी हरयाणा में पहले "बासोडा " कहते थे यानी बासी खाणा (शाम का बचा हुआ ) परन्तु आज कल ये शबद प्रयुक्त नहीं होता हे | दोपहर के खाने के लिए "जुआरा " कहलाता था यानी जुए के साथ काम करने वालों का खाणा क्यूंकि हरयाणा वासी अधिकतर खेती करते थे और दोपहर का खाणा खेत में ही खाते थे | रात का भोजन शायद "रतोडा " कहलाता था |

भाई रविंदर जहाँ तक मुझे याद है breakfast ने क्ल्लेवार की रोटी कहा करते | हो सकता ह ये शब्द कलेवा से ही बना हो |
 
[FONT=Verdana, Arial, Tahoma, Calibri, Geneva, sans-serif]आपापोखी [/FONT]: स्वार्थी |
शाब्दिक अर्थ : आपा = खुद का ,पाखी = पक्ष का यानी जो बन्दा बस आपणा -आपणा सोचे |
वाक्य में परयोग : यु माणस भोत आपापोखी स , दुस्र्याँ के बारे में ते कदे सोचदा-ए कोणी | |
 
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