कश्मीर में हुआ ७१ प्रतिशत मतदान कश्मीरियों की बदलती मनोदशा दिखा रहा है ! लगता है कश्मीर की महिलाओं ने खुलकर बीजेपी को मतदान किया है
! मोदीजी ही पीड़ा से मुक्ति दिला सकते हैं।आतंकवाद से सब से अधिक वेदना नारियों को भुगतनी पड़ती है, वेदना धर्म अथवा संप्रदाय देखकर नहीं आती है !! अब तो वैसा होगा कि कराची में भी मोदी अथवा उनके समर्थक खडे रहें तो बहुमत प्राप्त कर सकते हैं।
ghana lamba plan bana diya bhai. modi wave chugarde kai phoch li sai. hahaऐसा होना कोई बड़ी बात नहीं है। पाकिस्तान, भारत और बंगलादेश के मुसलमान इस बात को समझते हैं कि वे मुसलमान बनने से पहले हिंदू थे और मुस्लिम आक्रमणकारियों के भय, लालच और हिंदू धर्म के विरुद्ध झूठे दुष्प्रचार के कारण वे मुसलमान बने। वे यह भी समझते हैं कि इस्लाम अपनाकर वे एक विदेशी धर्म की गुलामी कर रहे हैं। मोदी जैसे भरोसेमंद और जमीन से जुड़े व्यक्ति के भारतीय सत्ता में आने के कारण वे भारत की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। यदि एक माहौल बनाया जाए तो पाकिस्तानियों और बंगलादेशियों को वापस हिंदू धर्म में आने के लिए तो प्रेरित किया ही जा सकता है, साथ ही नेपाल की तरह उनके साथ बॉर्डर भी खोला जा सकता है। आईएसआई, पाकिस्तानी सेना या कठमुल्ले आतंकवादी तो फिर छिपने की जगह तलाशेंगे। भारत एक बड़ा बाजार है, जो माहौल सामान्य होने पर कश्मीर जैसे राज्यों को कुछ ही महीनों के अंदर पुनः स्वर्ग बना सकता है। कश्मीर एक सुविख्यात पर्यटन स्थल है, जिसकी ख्याति दूर-दूर तक है, लेकिन अभी भी बहुत से लोग आतंकवाद के कारण वहां पर्यटन पर जाने से बचते हैं। ऐसा ही पाकिस्तान और बंगलादेश के बारे में भी कहा जा सकता है, भले ही पर्यटन के संदर्भ में नहीं, बल्कि कई अन्य संदर्भ में...।
कश्मीर, पाकिस्तान और बंगलादेश में लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं...। आतंकवाद ने कश्मीर और पाकिस्तान को बहुत बुरी तरह से प्रभावित किया है। वे लोग बदलाव चाहते हैं...बस उन्हें एक भरोसेमंद व्यक्ति चाहिए...। देखें, मोदी उनके भरोसे को भी जीत पाते हैं या नहीं...
Subversion of democracy becomes necessary during wartime. Kashmir has always been a flashpoint and the situation has been warlike. Alienation is the byproduct of compulsory subversion and not intentional. Kashsmir is highly strategic part of India having a difficult border with a hostile neighbour. India can not afford to part with it at any cost. It would be suicidal to give space to the populist sentiments which have roots in secessionist agenda spearheaded by our neighbour by proxy from day one after partition.
dekhna hoga - roti ki bhookh jeetegi ya khudaari kashmiri musalmaan ki !
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