Mera Intzaar Karna !

jakhmo ko sahlaney ke bahaney dil ko bahlaya kartey hain
mita ke mohabat ke naam par ilzam unn pe dharte hain

मोहब्बत में खुद को मिटा देना तो इश्क की फ़ितरत है
हुस्न वालों को तो इल्ज़ाम लगाने से ही फ़ुरसत कहाँ ||
 
विजय भाई , आप जैसा सवेदनशील और कोमल हृदय व्यक्ति ही इतना सुंदर लिख सकता है !
बहुत खूब !यूँ ही लिखते रहो !


खुश रहो !
 
Very nice Vijay ji...thnx for sharing

Har ilzam ka haqdar wo hume bana jaate hain,
Har khata ki saza wo hume suna jaate hain,
Hum bas khamosh rah jaate hain,
Kyunki wo apna hone ka ehsas dila jaate hain.
मोहब्बत में खुद को मिटा देना तो इश्क की फ़ितरत है
हुस्न वालों को तो इल्ज़ाम लगाने से ही फ़ुरसत कहाँ ||
 
विजय भाई , आप जैसा सवेदनशील और कोमल हृदय व्यक्ति ही इतना सुंदर लिख सकता है !
बहुत खूब !यूँ ही लिखते रहो !


खुश रहो !

धन्यवाद सत्यपाल भाई साहब,

मानवीय संवेदनाओ से ही मजबूर होकर दिल अभिव्यक्ति के लिये प्रेरित होता है । संवेदना ही कोमलता लाती है । भावनाओं का समन्दर जब दिल में लहराता है तो उसे प्रकट करने की तीव्र इच्छा सी जाग्रत होती है और इसी के फ़लस्वरूप काव्य का जन्म होता है ।
 
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Wonderful !

Very nice Vijay ji...thnx for sharing

Har ilzam ka haqdar wo hume bana jaate hain,
Har khata ki saza wo hume suna jaate hain,
Hum bas khamosh rah jaate hain,
Kyunki wo apna hone ka ehsas dila jaate hain.

Beautifully written:) Amrita.
I admire it when people write technically correct compositions.
Keep it up.



न चाहते हुए भी हमको वो सता ही जाते हैं
राज की बातें आखिर चुपके से बता ही जाते हैं ।
हज़ार बार कहा कि प्यार नाम है कुरबानी का
लेकिन वो तो मोहब्बत का हक जता ही जाते हैं ॥
 
Thanks Vijay.


Pyar me qurban to hum ho hi gaye hain,
Apna sab kuch lootakar kho hi gaye hain,
Haq tha unpar mohabbat ka haq jatane ka,
Wo haq bhi aaj humse wo loot le gaye hain.


Beautifully written:) Amrita.
I admire it when people write technically correct compositions.
Keep it up.



न चाहते हुए भी हमको वो सता ही जाते हैं
राज की बातें आखिर चुपके से बता ही जाते हैं ।
हज़ार बार कहा कि प्यार नाम है कुरबानी का
लेकिन वो तो मोहब्बत का हक जता ही जाते हैं ॥
 

ये मेरी हिन्दी में लिखी पहली पंक्तियाँ हैं ....डी.एन.देसवाल जी का कैसे शुक्रिया अदा करू:)


प्यार का हक किसी पे जताया नही जाता
किसी को दिल का जखम दिखाया नही जाता
समझता है प्यार करने वाला ख़ुद ब ख़ुद
दिल चीर कर तो ऐसे दिखाया नही जाता
thanks vijay.


Pyar me qurban to hum ho hi gaye hain,
apna sab kuch lootakar kho hi gaye hain,
haq tha unpar mohabbat ka haq jatane ka,
wo haq bhi aaj humse wo loot le gaye hain.
 
Last edited:
thanks vijay.


Pyar me qurban to hum ho hi gaye hain,
apna sab kuch lootakar kho hi gaye hain,
haq tha unpar mohabbat ka haq jatane ka,
wo haq bhi aaj humse wo loot le gaye hain.


मोहब्बत में हज़ारों दीवाने छले जाते हैं
शमां की तपिश में परवाने जले जाते हैं ।
न जाने क्या मज़ा है प्यार के खेल में
लूटने वाले खुद ही लुट कर चले जाते हैं ॥
 
ये मेरी हिन्दी में लिखी पहली पंक्तियाँ हैं ....डी.एन.देसवाल जी का कैसे शुक्रिया अदा करू:)


प्यार का हक किसी पे जताया नही जाता
किसी को दिल का जखम दिखाया नही जाता
समझता है प्यार करने वाला ख़ुद ब ख़ुद
दिल चीर कर तो ऐसे दिखाया नही जाता

बहुत अच्छा लिखा सुनीता :)



जो दिल में उतरने का शौक है तो बरास्ता क्या
पहलू में अगर मंजिल है तो ढूंढना रास्ता क्या ।
बेवजह शरीफ़ों के घर में झांकने से बाज आइये
मेरे दिल के मेहमान से दुनियाँ को वास्ता क्या ॥
 
आस्मां के तारे अक्सर पूछते हैं हमसे
क्या तुम्हे आज भी इंतज़ार है उसके लौट आने का
और ये दिल मुस्कुरा के कहता है
मुझे तो अब तक यकीन नही उसके चल जाने का
 
आंधिया वो चली आशियाँ लुट गया ,
प्यार का मुस्कुराता जहाँ लुट गया l
यकीं था जिस पर ख़ुद से भी ज्यादा ,
आज वही शक्स हमे बर्बाद कर गया ll


मोहब्बत में हज़ारों दीवाने छले जाते हैं
शमां की तपिश में परवाने जले जाते हैं ।
न जाने क्या मज़ा है प्यार के खेल में
लूटने वाले खुद ही लुट कर चले जाते हैं ॥
 
ये मेरी हिन्दी में लिखी पहली पंक्तियाँ हैं ....डी.एन.देसवाल जी का कैसे शुक्रिया अदा करू:)


प्यार का हक किसी पे जताया नही जाता
किसी को दिल का जखम दिखाया नही जाता
समझता है प्यार करने वाला ख़ुद ब ख़ुद
दिल चीर कर तो ऐसे दिखाया नही जाता


दिल चीर कर तो उसका कभी देखा नही हमने ,
हिसाब प्यार का तो उससे कभी माँगा नही हमने l
समझा था उसके प्यार को लेकिन ,
वो जिंदगी भर ना भरने वाला एक ज़ख्म दे गया ll
 
आंधिया वो चली आशियाँ लुट गया ,
प्यार का मुस्कुराता जहाँ लुट गया l
यकीं था जिस पर ख़ुद से भी ज्यादा ,
आज वही शक्स हमे बर्बाद कर गया ll


मोहब्बत में यही सुलूक सैयाद करते है
पहले आबाद किया फ़िर बर्बाद करते हैं ।
जो आते हैं महज़ चले जाने के लिये
हम किसलिये उनको ही याद करते हैं ॥
 
आस्मां के तारे अक्सर पूछते हैं हमसे
क्या तुम्हे आज भी इंतज़ार है उसके लौट आने का
और ये दिल मुस्कुरा के कहता है
मुझे तो अब तक यकीन नही उसके चल जाने का


दिलों का सौदा करना इतना आसान भी नहीं
यकीन करोगे तो दिल पर चोट कर जायेगा ।
आखों से पर्दा हटाकर जरा सच्चाई तो देखो
वह आया ही कब था जो लौट कर जायेगा ॥
 
kissi ko panne ki chahat se bhi aksar pyar ho jaata hai
kissi pe yaken ke liye dil kaa souda karro ye jaroori to nahi
kissi jhooth ke sahare bhi aksar jee liya jaata hai
har baat se parda uthaya jaaye ye jaroori to nahi


vijay bhai jaisa meri samaj aaya likha diya :) koi tech problem ho to jarror batna kai baar kuch likhna bahut accha lagta hai muje bhi

दिलों का सौदा करना इतना आसान भी नहीं
यकीन करोगे तो दिल पर चोट कर जायेगा ।
आखों से पर्दा हटाकर जरा सच्चाई तो देखो
वह आया ही कब था जो लौट कर जायेगा ॥
 
vijay bhai jaisa meri samaj aaya likha diya :) koi tech problem ho to jarror batna kai baar kuch likhna bahut accha lagta hai muje bhi

विवेक,

चार पंक्तियो की रचना को हिन्दी में ’मुक्तक’, उर्दू में ’रुबाई’ और English में Quatrain कह्ते हैं । इसमें विभिन्न प्रकार की रचनाओं को लिखा जा सकता है । सामान्य कानून ये है कि चारों पंक्तियो में एक निश्चित लय होनी चाहिये ।

सामन्यत रुबाई या मुक्तक में पहली, दुसरी और चौथी पंक्ति तुकात्मक रुप से समाप्त होनी चाहिये और वह तुकात्मक शब्द बोलने में बिल्कुल एक जैसे होने चाहिये । तुकात्मक अंत का मतलब ’काफ़िया’ और ’रदीफ़’ से है ।

उदाहरण के लिये :

मोहब्बत में हज़ारों दीवाने छले जाते हैं
शमां की तपिश में परवाने जले जाते हैं ।
न जाने क्या मज़ा है प्यार के खेल में
लूटने वाले खुद ही लुट कर चले जाते हैं ॥


ये रुबाई AABA में लिखी गई है । AABA का मतलब है कि पहली, दुस्ररी और चौथी पंक्ति का समापन एक जैसा होना चहिये । इस रुबाई में ’जाते हैं’ इसका ’रदीफ़’ है और समान रुप से बोले जाने वाले शब्द ’छले’, ’जले’ और ’चले’ इसका ’काफ़िया’ कहलाते हैं ।

अब काफ़िय और रदीफ़ को मिलाकर ये शब्द ऐसे बनते हैं :

छले जाते हैं
जले जाते हैं
चले जाते हैं

जो कि बिल्कुल एक जैसे हैं और इसी से ये रचना तकनीकी रुप से शुद्ध बनी है ।


अब जरा अपनी लिखी हुइ रचना को देखो :

kissi ko panne ki chahat se bhi aksar pyar ho jaata hai
kissi pe yaken ke liye dil kaa souda karro ye jaroori to nahi
kissi jhooth ke sahare bhi aksar jee liya jaata hai
har baat se parda uthaya jaaye ye jaroori to nahi

लाल रंग वाले शब्द रंग में भंग डाल रहे हैं ।

ये आपने ABAB में लिखने की कोशिश की है .. मतलब पहली और तीसरी पंक्ति एक जैसी समाप्त होनी चहिये और दुसरी और चौथी एक जैसी । पहली और तीसरी पंक्ति में रदीफ़ तो आपने ”जाता है" एक जैसा रखा जो कि बिल्कुल सही है लेकिन रदीफ़ से पहले ’काफ़िया’ गलत लिख गये ( ’हो’ और ’लिया’ शब्दों में कोइ समानता नहीं है ) जो कि गलत है ।

ठीक इसी तरह दुसरी और चौथी पंक्ति में रदीफ़ ( ये जरुरी तो नहीं) फ़िर सही है लेकिन काफ़िये फ़िर गलत कर दिये ( ’करो’ और ’जाये’ में कोई समानता नहीं है ) ’करो’ के साथ सही काफ़िया मरो, धरो, चरो या हरो होना चाहिये । इसी प्रकार ’जाये’ के साथ ’आये’, ’पाये, ’लाये’, ’खाये’ इत्यादि ।

याद रखो पंक्ति का अंत ( काफ़िया + रदीफ़ ) एक जैसा होना चहिये । रदीफ़ दोनो पंक्ति में वही शब्द होता है और काफ़िया एक जैसे बोले जाने वाला शब्द ।

आप किसी भी प्रकार कि रचना लिख सकते हैं जैसे AABA, ABAB, AABB, AAAA लेकिन ’काफ़िया’ और ’रदीफ़’ का उपयोग अगर सही प्रकार से नहीं किया तो तकनीकी रुप से वह एक गलत रचना मानी जायेगी ।

अगर काफ़िया और रदीफ़ अभी भी समझ नहीं आया तो एक बार इसे पढ्कर देखो । उमीद है जरुर समझ आ जायेगा ।

http://www.jatland.com/forums/group.php?&do=discuss&groupid=4&discussionid=69&gmid=630#gmessage630

फ़िर भी कुछ और पूछ्ना हो तो मुझे लिख सकते हो । मैं सहायता के लिये सदैव उपलब्ध हूँ ।:)
 
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Awesome composition Vijay, every word written here is direct dil-se :)
Have always enjoyed poetry written by you.
Keep pouring.....

Some thing from my collection .....

phir usi raahguzar par shayad..
hum kabhi mil sakein .. magar shayad..

jo bhi bichhde hain kab mile hain FARAZ..
phir bhi tu intezaar kar .. shayad..

मेरा इंतज़ार करना


वादा वो मोहब्बत का मैं निभाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥

ज़माने से अलग पह्चान है मेरी
दुनियाँ की भीड में खोया नहीं हूँ
जुदाई की रात चाहे लम्बी सही
सुबह के इंतज़ार में सोया नही हूँ
हर पल बस तुमको ही याद किया
आँखें नम हुईं लेकिन रोया नही हूँ
कैसे गुजरे थे ये दिन मैं सुनाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥

व्यस्त हूँ ज़िन्दगी की उलझनों में
मत सोचना कि तुमसे प्यार नही है
वादा करके जुबान से मुकर जाऊँ
ऐसे तो मिले मुझे संस्कार नहीं है
फ़ैसला मेरा जमाने ने सुन लिया
तुम बिन ज़िन्दगी स्वीकार नहीं है
मैने तुमको चाहा है तुमको पाऊँगा एक दिन ॥
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥

आज हम और तुम इतने दूर सही
यह तो अपनी किस्मत का लेखा है
हमें मिलने से कोई न रोक पायेगा
मेरे हाथ में तुम्हारे नाम की रेखा है
तुम मंज़िल हो मेरे इस सफ़र की
कितनी बार तुम्हें सपने में देखा है
सपनों को हकीकत में बदल जाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥

दिल की हर आरज़ू को अंजाम दूँगा
तुम अधूरी हसरतों का मलाल रख्नना
उदास रहने से झुर्रियाँ पड जाती हैं
अपने हसीन चेहरे का खयाल रखना
ज़िन्दगी छोटी सी है और काम ज्यादा
मेरे लिये बचा कर कुछ साल रख्नना
अपनी ज़िन्दगी तुम पर मैं लुटाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊंगा एक दिन ॥

सच्चे दिल की सदायें कुबूल होती हैं
खुदा को तुम दुआयें तमाम लिखना
दीवानापन अगर हद से गुजरने लगे
अपनी चाहत पर कोई कलाम लिखना
जब दिल मिले हैं तो हम भी मिलेंगे
मेरा नाम जोडकर अपना नाम लिखना
तुमको ही अपनी पह्चान मैं बनाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥

वह सवेरे का सूरज जब भी निकलेगा
जुदाई की ये काली रात गुजर जायेगी
उतरेगी समंदर में जब अपनी किश्ती
मंज़िल तक छोडने खुद लहर जायेगी
साथ मिलकर किसी दिन ढूँढ ही लेंगे
ये खुशी हमसे बच कर किधर जायेगी
हँसी तुम्हारे होठों पर मैं सजाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥

हमसफ़र बन कर हम जब भी चलेंगे
मेरे हाथों में अपना हाथ थमाना होगा
ज़िन्दगी के तन्हा पथरीले रास्तों पर
मेरे हर कदम से कदम मिलाना होगा
वह दिन आयेगा मुझपे यकीन करना
बाँहों में आस्माँ कदमों में जमाना होगा
जमाने को तुम्हारे आगे मैं झुकाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥

बढते हुए कदम अब नहीं रुकने वाले
तीर कब का निकल चुका है कमान से
चाहे जैसा भी हो अंजाम देखा जायेगा
मोहब्बत नहीं डरती किसी इम्तहान से
जमीन वाले बस देखते ही रह जायेंगे
जब माँग लाऊँगा मैं तुम्हे आसमान से
विजय तुम्हारी किस्मत में लिख जाऊँगा एक दिन ॥
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥
 
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