तेरे हर दुख को अपना बना लूँ..
तेरे हर गम को दिल सेलगा लूँ..
मुझे करनी आती नहीं चोरी वरना..
मैं तेरी आँखों से हर आँसू चुरालूँ......
दिल के जख्मों को उनसे छुपाना पड़ा,
पलके भीगीं थी पर हमें मुस्कुराना पड़ा,
कैसे उल्टे हैं मुहब्बत के ये रिवाज?
रूठना चाहते थे पर उनको मनाना पड़ा......:tongue:
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