आज फेसबुक पर एक सुथरी सी महिला का फोटू देखके मेरे तैं कमेन्ट मारे बिना नहीं डटया गया i पूराणी बाण के सहज मै छूटया करै i हालाँकि मन्नै बेरा सै रविंदरजीत छुट्टी पर ना गया होया तो उलटे सीधे कमेंट मारैगा आर न्यू कहैगा "देखो इस उम्र मै माणस की के शर्म भाजगी " . शायरी न्यू सी बणाइ थी :
खुदा ऐसे ही शहकार बनाये तो ये दुनियाँ कितनी खुशगवार हो जाए
मुहब्बत के फूलों की खुशबू से सरोबार ये सारा चमनज़ार हो जाए i
कुदरत का अनमोल तोहफा है ये हुश्न जो दिलों पर राज़ करता है
मगर दुःख है के ये बेदर्द अक्सर दौलत के सर का ताज़ बनता है i
हुश्नवालों की एक मुश्कान पर तख्तो-ताज़ निसार हो जाते हैं ,
आते हैं जब वे महफ़िल में नाजो-अंदाज़ से, दिल बेकरार हो जाते है i
खुदा ऐसे ही शहकार बनाये तो ये दुनियाँ कितनी खुशगवार हो जाए
मुहब्बत के फूलों की खुशबू से सरोबार ये सारा चमनज़ार हो जाए i
कुदरत का अनमोल तोहफा है ये हुश्न जो दिलों पर राज़ करता है
मगर दुःख है के ये बेदर्द अक्सर दौलत के सर का ताज़ बनता है i
हुश्नवालों की एक मुश्कान पर तख्तो-ताज़ निसार हो जाते हैं ,
आते हैं जब वे महफ़िल में नाजो-अंदाज़ से, दिल बेकरार हो जाते है i