Shayri (Continued)

आज फेसबुक पर एक सुथरी सी महिला का फोटू देखके मेरे तैं कमेन्ट मारे बिना नहीं डटया गया i पूराणी बाण के सहज मै छूटया करै i हालाँकि मन्नै बेरा सै रविंदरजीत छुट्टी पर ना गया होया तो उलटे सीधे कमेंट मारैगा आर न्यू कहैगा "देखो इस उम्र मै माणस की के शर्म भाजगी " . शायरी न्यू सी बणाइ थी :

खुदा ऐसे ही शहकार बनाये तो ये दुनियाँ कितनी खुशगवार हो जाए
मुहब्बत के फूलों की खुशबू से सरोबार ये सारा चमनज़ार हो जाए i

कुदरत का अनमोल तोहफा है ये हुश्न जो दिलों पर राज़ करता है
मगर दुःख है के ये बेदर्द अक्सर दौलत के सर का ताज़ बनता है i

हुश्नवालों की एक मुश्कान पर तख्तो-ताज़ निसार हो जाते हैं ,
आते हैं जब वे महफ़िल में नाजो-अंदाज़ से, दिल बेकरार हो जाते है i
 
भारत माँ की प्यास बुझाने, आ जाओ अमृत के प्यालों।
फिर यह धरती बुला रही है, जागो महाकाल के कालों॥
 
या फेसबुक शायर बणा के छोडैगी i एक और कमेंट i

ये नूर टपकता आँखों से ज्यों सूरज धरती पर आया है
भोली सी सूरत पर देखो ये रूप गज़ब का छाया है i
नया नया ये फूल खिला है, जिसकी छटा निराली है,
कुछ कांटे भी हैं मगर चमन में जिनकी नीयत काली है i
फूलों की भीनी महक सूंघकर कर भँवरे भी मंडराएंगे,
हुश्न और निखरेगा जब हवा के झोंके जुल्फों से टकरायेंगे i
मगर बागबां पशेमान है ये फूल कोई ले जायेगा,
जिसे नाज़ से पाला था वो यों बेगाना हो जायेगा i
 
लाज्मी नही के आँखो से ही देंखू तुझे |
तेरा तसव्व्वुर क्या तेरे दीदार से कम है ||
 
स्वाधीनता हो गयी है वृद्ध, आयु हो गयी साठ।
आज के बच्चे, कैसे समझें, देश भक्ति का पाठ।

ना कोई भगत सिंह, ना कोई सुभाष, ना वन्दे मातरम् का नारा,
अब तो युवाओं को भाए, एश, सुष्मिता, लारा !!!!!!
 
जीवन बहुत सुन्दर है जीवन से प्रेम करो,
हर रात को भोर की प्रतीक्षा करो,
वो क्षण भी आयेगा जिसकी प्रतीक्षा है आपको,
राम पर भरोसा और समय पर विश्वास करो।
 
Kaha tum ne mujhe dil Se bhula do tum,

mita do tum,

chalo hum maan lete hein,

Tumhein hum apne is dil se,

Bhula dein gy,

Mita dein gy,

magr ik kam to kr do,

Ke nadiya ke kinaron ko kisi surat mila do Tum,

sitarey torr kar la do,

ya phr ek phool se khushbu juda kr ke dikha do tum,

Suno!

Tum kr bhi lo aisa,

kinare jorr bhi lao,

Sitarey torr bhi lao,

Chaman ke sare phoolon se juda khushbu ko kr bhi do,

magr hum tum ko is dil se mita phr bhi nhi skty

Suno!

Hm mar to skty hn,

bhula phr b nai skty,

Haan...!!!

Bhula phr b nai skty...
 
उनकी तो ये आदत है
हर वक़्त आजमाने की
हमें भी जिद है ,
हर वक़्त जीत जाने की.
हजूमे ग़म भी फितरत
बदल नहीं सकते ,
हमें आदत है ग़म में भी मुस्कुराने की.
 
वफाये मांगते फिरते है फकीरों की तरह |
अजीब लोग है कहते है मुहब्बत की है ||
 
सिर्फ में ही थाम सकू हाथ उसका,
मुझ पर तू इतनी इनायत सी कर दे |
वो रह न पाए एक पल भी मेरे बिना ,
ऐ खुदा उसे मेरी आदत सी कर दे ||
 
सोचों तो सिलवटों से भरी है तमाम रूह |
देखो तो शिकन भी नहीं है लिबास में ||
 
एहसास की शिद्दत को समझाउं भला कैसे,
दरिया तो इन हाथों में समेटी नहीं जाती....
 
आज फेसबुक पर एक सुथरी सी महिला का फोटू देखके मेरे तैं कमेन्ट मारे बिना नहीं डटया गया i पूराणी बाण के सहज मै छूटया करै i हालाँकि मन्नै बेरा सै रविंदरजीत छुट्टी पर ना गया होया तो उलटे सीधे कमेंट मारैगा आर न्यू कहैगा "देखो इस उम्र मै माणस की के शर्म भाजगी " . शायरी न्यू सी बणाइ थी :

खुदा ऐसे ही शहकार बनाये तो ये दुनियाँ कितनी खुशगवार हो जाए
मुहब्बत के फूलों की खुशबू से सरोबार ये सारा चमनज़ार हो जाए i

कुदरत का अनमोल तोहफा है ये हुश्न जो दिलों पर राज़ करता है
मगर दुःख है के ये बेदर्द अक्सर दौलत के सर का ताज़ बनता है i

हुश्नवालों की एक मुश्कान पर तख्तो-ताज़ निसार हो जाते हैं ,
आते हैं जब वे महफ़िल में नाजो-अंदाज़ से, दिल बेकरार हो जाते है i

[h=5]Kar na tu is tarah khudko kisi par fida
Ki teri har khushi bas ussi se judi ho[/h]
 
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