Shayri (Part 1)

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इरादा छोड़ दिया उसने हदों से जुड़ जाने का
ज़माना है ज़माने की निगाहों में न आने का
कहाँ की दोस्ती किन दोस्तों की बात करते हो
दुश्मन नहीं मिलता कोई अब तो ठिकाने का
निगाहों में कोई भी दूसरा चेहरा नहीं आया
भरोसा ही कुछ ऐसा था तुम्हारे लौट आने का
ये मैं ही था बचा के खुद को ले आया किनारे तक
समंदर ने बहोत मौका दिया था डूब जाने का
 
रिश्तों की डोरी कमज़ोर होती है ,
आँखों की बातें दिल की चोर होती हैं ,
किसी ने जब भी पूछा दोस्त का मतलब ,
हमारी ऊँगली आपकी और होती है …​
 
घर अधूरा खाट बिना..
तराजू अधूरा बाट बिना..
राजा अधूरा ठाठ बिना..
देश अधूरा जाट बिना
 
एक पल मे सदियों का मज़ा हम से पूछिए,,
दो दिन की जिन्दंगी का मज़ा हम से पूछिए!!
ना भूले हैं उन्हें हम मुद्दतो से,,
किस्तों मे खुदखुशी का मज़ा हम से पूछिए!!
 
न आज लुत्फ़ कर इतना कि कल गुज़र न सके
वह रात जो कि तेरे गेसुओं की रात नहीं
यह आरजू भी बड़ी चीज़ है मगर हमदम
विसाले यार फकत आरजू की बात नहीं
 
है शोक - ए - सफ़र ऐसा के एक उमर से हमने
मंजिल भी ना पाई पर रास्ता भी ना बदला
 
चाक अरमानों को, दिल को पारा-पारा कर दिया
फिर यकीं की झील के पानी को ख़ारा कर दिया
कँपकँपाती शाम ने, कल माँग ली चादर मेरी
और जाते-जाते, जाड़े को इशारा कर दिया
 
ik ishq kaa Gham aafat aur us pe ye dil aafat
yaa Gam naa diyaa hotaa yaa dil na diyaa hotaa

naakaam-e-tamannaa dil is soch mein rahataa hai
yuuN hotaa to kyaa hotaa yuuN hotaa to kyaa hotaa
 
रिश्तों की डोरी कमज़ोर होती है ,
आँखों की बातें दिल की चोर होती हैं ,
किसी ने जब भी पूछा दोस्त का मतलब ,
हमारी ऊँगली आपकी और होती है …​

Bhai Sahab katti kalje ki talli mein jake lagya


mere wo din yaad aage jab naye naye jawan hon lage the.




ise ise sher Sheela bypass se purane bus adde chalan aali tethan mein chipe paya karte Mamta Kulkarni ki fotu gel.:triumphant:
 
Bhai Sahab katti kalje ki talli mein jake lagya


mere wo din yaad aage jab naye naye jawan hon lage the.




ise ise sher Sheela bypass se purane bus adde chalan aali tethan mein chipe paya karte Mamta Kulkarni ki fotu gel.:triumphant:
हा हा हा ,इबके गाम में गया जब मन्ने तेथन में-ए लिखा देखा था यु , अर लिख के ने लाया था , अक राकेश क भोत पसंद आवेगा ,अर उह के बचपन की याद दुवावेगा ,ज्यां तें-ए लिख मार्या |
 
हा हा हा ,इबके गाम में गया जब मन्ने तेथन में-ए लिखा देखा था यु , अर लिख के ने लाया था , अक राकेश क भोत पसंद आवेगा ,अर उह के बचपन की याद दुवावेगा ,ज्यां तें-ए लिख मार्या |

Ek Manne bhi padhya tha

Specially aapki khater
[h=6]हमें तो अपनों ने लूटा,
गैरों में कहाँ दम था.
मेरी हड्डी वहाँ टूटी,
जहाँ हॉस्पिटल बन्द था.
मुझे जिस एम्बुलेन्स में डाला,
उसका पेट्रोल ख़त्म था.
मुझे रिक्शे में इसलिए बैठाया,
क्योंकि उसका किराया कम था.
मुझे डॉक्टरों ने उठाया,
नर्सों में कहाँ दम था.
मुझे जिस बेड पर लेटाया,
उसके नीचे बम था.
मुझे तो बम से उड़ाया,
गोली में कहाँ दम था.
और मुझे सड़क में दफनाया,
क्योंकि कब्रिस्तान में फंक्शन था
नैनो मे बसे है ज़रा याद रखना,
अगर काम पड़े तो याद करना,
मुझे तो आदत है आपको याद करने की,
अगर हिचकी आए तो माफ़ करना.......
ये दुनिया वाले भी बड़े अजीब होते है
कभी दूर तो कभी क़रीब होते है
दर्द ना बताओ तो हमे कायर कहते है
और दर्द बताओ तो हमे शायर कहते है[/h]
 
Ek Manne bhi padhya tha

Specially aapki khater
हमें तो अपनों ने लूटा,
गैरों में कहाँ दम था.
मेरी हड्डी वहाँ टूटी,
जहाँ हॉस्पिटल बन्द था.
मुझे जिस एम्बुलेन्स में डाला,
उसका पेट्रोल ख़त्म था.
मुझे रिक्शे में इसलिए बैठाया,
क्योंकि उसका किराया कम था.
मुझे डॉक्टरों ने उठाया,
नर्सों में कहाँ दम था.
मुझे जिस बेड पर लेटाया,
उसके नीचे बम था.
मुझे तो बम से उड़ाया,
गोली में कहाँ दम था.
और मुझे सड़क में दफनाया,
क्योंकि कब्रिस्तान में फंक्शन था
नैनो मे बसे है ज़रा याद रखना,
अगर काम पड़े तो याद करना,
मुझे तो आदत है आपको याद करने की,
अगर हिचकी आए तो माफ़ करना.......
ये दुनिया वाले भी बड़े अजीब होते है
कभी दूर तो कभी क़रीब होते है
दर्द ना बताओ तो हमे कायर कहते है
और दर्द बताओ तो हमे शायर कहते है

सहरावत भाई साहब! यो तो रेल पै लिख्या होया पढ़ा है जणू। तेथन पर तो कोन्या आवै। बाकी सै कसूत।
Thanx.
 
Ek Manne bhi padhya tha

Specially aapki khater
हमें तो अपनों ने लूटा,
गैरों में कहाँ दम था.
मेरी हड्डी वहाँ टूटी,
जहाँ हॉस्पिटल बन्द था.
मुझे जिस एम्बुलेन्स में डाला,
हा हा हा हा हा आज साबत दिन ये -ए कठे करदा हांडे था केरा | भोत बढ़िया |
 
बात ऊँची थी मगर बात ज़रा कम आकीं,
उस ने जज़्बात कि औकात ज़रा कम आकीं,
वो फ़रिश्ता मुझे कह कर ज़लील करता रहा,
मैं हूँ इंसान मेरी जात ज़रा कम आकीं ...

Dr. Kumar Vishwas
 
एक शमशान के बाहर लिखा था -

मंजिल तो तेरी यही थी, बस...
जिंदगी गुजर गयी तेरी आते आते...
क्या मिला तुझे इस दुनिया से... ?
अपनो ने ही जला दिया तुझे जाते जाते...
 
महबूब को चाँद कहते हो कभी खुदा बताते हो
बुढे माँ - बाप के बारे में तेरा क्या ख्याल हैं.
तेरे गिरते हुए कदमो को जिन्होंने चलना सिखाया था
आज वो गिर रहे हैं तो तेरा क्या ख्याल हैं.
कभी माँ की लोरी सुनकर ही तुझे नींद आती थी
रात को माँ खांस रही हैं तेरा क्या ख्याल हैं.
निगाहे- नाज़ की तारीफ तो कभी हुस्न को सजदे
टूटे हुए बाप के चश्मे पर तेरा क्या ख्याल हैं.
किसी अन्जान के लिए पल में मरने कीकसमे
तुझे जन्म देने वालों के लिए तेरा क्या ख्याल हैं .
 
महबूब को चाँद कहते हो कभी खुदा बताते हो
बुढे माँ - बाप के बारे में तेरा क्या ख्याल हैं.
तेरे गिरते हुए कदमो को जिन्होंने चलना सिखाया था
आज वो गिर रहे हैं तो तेरा क्या ख्याल हैं.
कभी माँ की लोरी सुनकर ही तुझे नींद आती थी
रात को माँ खांस रही हैं तेरा क्या ख्याल हैं.
निगाहे- नाज़ की तारीफ तो कभी हुस्न को सजदे
टूटे हुए बाप के चश्मे पर तेरा क्या ख्याल हैं.
किसी अन्जान के लिए पल में मरने कीकसमे
तुझे जन्म देने वालों के लिए तेरा क्या ख्याल हैं .

kajla saare shera ka tood kaadha diya
excellentttttttttttt................
 
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