Shayri (Part 1)

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Na jaane kyon hamain ansoo bahana nahin aata,,,ना जाने क्यों हमें आंसू बहाना नहीं आता,,
Na jaane kyon hamain haal-e-dil sunana nahin aata,,,ना जाने क्यों हमें हाल-ए-दिल सुनाना नहीं आता,,,
Kyon saathi bichhad jaate hain hamesha,,,क्यों साथी बिछड जाते हैं हमेशा,,,
Shayad hamain hii saath nibhana nahin aata,,,शायद हमें ही साथ निभाना नहीं आता,,,,





Good. Keep it up!
 
Na jaane kyon hamain ansoo bahana nahin aata,,,ना जाने क्यों हमें आंसू बहाना नहीं आता,,
Na jaane kyon hamain haal-e-dil sunana nahin aata,,,ना जाने क्यों हमें हाल-ए-दिल सुनाना नहीं आता,,,
Kyon saathi bichhad jaate hain hamesha,,,क्यों साथी बिछड जाते हैं हमेशा,,,
Shayad hamain hii saath nibhana nahin aata,,,शायद हमें ही साथ निभाना नहीं आता,,,,





very nice...
 
लोग प्यार को खुदा कहते है, पर कोई करे तो गुनाह कहते है
"पत्थर दिल रोया नही करते" तो फिर पहाडों से ही झरने क्यों बहा करते हैं
 
उसको खुशबू के परखने का सलीका ही नहीं

फूल को कीमते ए बाजार से पहचानता हैं..
 
Khatayain yaad rakhta hai wafayain bhool jata hai,,,खतायें याद रखता है वफायें भूल जाता है,,,
Wo meri chaahton ki intihaa bhool jaata hai,,,वो मेरी चाहतों कि इंतिहा भूल जाता है,,,
Jo pichle jurm hain mere unko yaad rakhta hai,,,जो पिछले जुर्म हैं मेरे उनको याद रखता है,,,
Jo maine kaat li hain,vo sajayain bhool jaata hai...जो मैंने काट ली हैं,वो सजायें भूल जाता है....




 
यूँ ही तन्हाई में अब दिल को सजा देते हैं, नाम लिखते हैं तेरा लिख के मिटा देते हैं,,,
जब भी नाकाम मोहब्बत का कोई ज़िक्र करे, लोग हँसते हैं मेरा नाम बता देते हैं,,,
अब खुशी कि कोई तरकीब न सूझे, अब ये आलम है कि गम ही मज़ा देते हैं,,,
क्या जरूरत है की देते हो खुद को ये ज़हमत, लाओ हम खुद ही नशेमन को जला देते हैं,,,
अब तसल्ली नहीं दी जाती मरीज़ -ए-गम को, देखने वाले भी मरने कि दुआ देते हैं...
 
Har dhadkan main ek raaz hota hai,,,हर धडकन में एक राज़ होता है,,,
Har baat ko batane ka ek andaaz hota hai,,,हर बात को बताने का एक अंदाज़ होता है,,,
Jab tak thokar na lage bewafai kii,,,जब तक ठोकर न लगे बेवफाई की,,,
Har kisi ko apni mohabbat par naaz hota hai...हर किसी को अपनी मोहब्बत पर नाज़ होता है....

 
या इलाही ये आजमाइश की तेरी कैसी इंतेहा है,
क्यूं अब दिल को तन्हाई का अंधेरा ही भाता है.
जिक्र हो रहा होता है किसी और की बर्बादी का,
हमें उसमें क्यूं अपना अक्स नजर आता है.
राह-ए-इश्क में तूफानों से जूझने का आलम अब ये है
कि तेज हवा चलने से भी दिल घबराता है.
कांटों भरी इस राह पर लहू-लुहान तो हो गए हैं कदम,
पर कुछ बचा तो है, जिसकी चाह में मन गुनगुनाता है.
अब तो ठान लिया है कि हम नहीं या तू नहीं,
फिर भी कभी-कभी राह बदलने को जी चाहता है.
अगर तू खुश है इन जख्मों पर, दुश्वारियों पर,
तो तुझ पर हंसने में हमारा भी क्या जाता है.
क्या था पास में कि खोने के गम में बहाएं आंसू,
इन बर्बादियों-मायूसियों से तो मुद्दतों पुराना नाता है.
कभी हुआ हिसाब अगर एक-एक बात का,
तब पूछेंगे कि तू खुद पर इतना क्यों इतराता है.
 
Khatayain yaad rakhta hai wafayain bhool jata hai,,,खतायें याद रखता है वफायें भूल जाता है,,,
Wo meri chaahton ki intihaa bhool jaata hai,,,वो मेरी चाहतों कि इंतिहा भूल जाता है,,,
Jo pichle jurm hain mere unko yaad rakhta hai,,,जो पिछले जुर्म हैं मेरे उनको याद रखता है,,,
Jo maine kaat li hain,vo sajayain bhool jaata hai...जो मैंने काट ली हैं,वो सजायें भूल जाता है....




Bitter Truth...........
 
अपने हाथों की लकीरों में इस तरह शामिल कर लो मुझे

की जब भी दुआ के लिए हाथ उठाओ तो में याद आ जाऊँ !!
 
​तुम नज़र से नज़र मिलाते तो,बात करते ना , मुस्कुराते तो,,,
इख्त्लाफात होते रहते हैं,आना जाना था ,आते जाते तो,,,
दोस्ती में अना नहीं चलती, खुद न आते कभी बुलाते तो,,,
चांदनी रात सिसकियाँ भरती,तुम जरा अपनी छत पर आते तो,,,
भूलते शौक से हमें लेकिन, भूलने का हुनर बताते तो,,,
आ भी जाओ कि हम बुलाते हैं, तुम बुलाते जो,हम न आते तो,,,
बज़्म में दिल-नवाज़ हो जाते,तुम मेरे शेर गुनगुनाते तो....
 
Last edited:
Ye baare-falak hamne jameen par nahin rakha,,,ये बारे-फलक हमने ज़मीं पर नहीं रखा,,,
Thak ke kisi kaandhe pe kabhi sar nahin rakha,,,थक के किसी काँधे पे कभी सर नहीं रखा,,,
Kyon thokrain lagti hain,kii jab hamne kabhi bhi,,,क्यों ठोकरें लगती हैं,,की जब हमने कभी भी,,,
Raste main kisi ke koi pathar nahin rakha...रास्ते में किसी के कोई पत्थर नहीं रखा...



 
Jo hai is chirag ki jindgi,usi jindgi ke khilaf hai,,,
Ye chirag kaisa dhirag hai ke jo roshni ke khilaf hai,,,
Ye jala diya vo bujha diya ye to kaam hai kisi or ka,,,
Na hawa ke koi khilaf hai na hawa kisi ke khilaf hai,,,
Vo hai bewafa to wafa karo jo asar na ho to dua karo,,,
Jise chaaho use bura kaho ye to dosti ke khilaf hai,,,
Vo jo dhoop thi vo simat gai vo jo chandni thi bikhar gai,,,
Magar ek jugunu hakeer sa abhi teergi ke khilaf hai,,,
Vo jo mere gam main shareek tha jise mera gam bhi azeez tha,,,
Main jo khush hua to pata chala vo meri khushi ke khilaf hai...

 
Tum jaisa samjhte raha vaisa to nahin main,,,तुम जैसा समझते रहे वैसा तो नहीं मैं ,,,
Kaanta hoon magar phool ke chubhta to nahin main,,,काँटा हूँ मगर फूल के चुभता तो नहीं मैं
Apnon se to rootha hoon main 100 baar bahrhaal,,,अपनों से तो रूठा हूँ में १०० बार बहरहाल ,,,
Par gairon main jaakar kabhi baitha to nahin main...पर गैरों में जाकर कभी बैठा तो नहीं मैं,,,

 
यू ही रखते रहे हम , बचपन से दिल साफ अपना
पता नही था , कि कीमत तो चेहरो की होती है
 
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