Shayri (Part 1)

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काश! मालिक सेब का पौधा न बोता
ईव को देखकर एडम आपा न खोता..
किस्सा रिस्तों का अगर ये न होता
मस्त कहीं मैं भी चैन की नींद सोता ।।
 
तू मेरे जिक्र-ए-इश्क में क्यूँ रहता है
मैं तो खुद अपनी कहानी से अलग रहता हूँ
 
कोई नहीं है मेरे जैसा चारों तरफ
अपने गिर्द इक भीड़ सजा कर तन्हा हूँ
 
दहलीज़ पे टूटे हुए सागर की तरह
उस शख्स ने फेंका है हमें प्यास बुझा कर
 
तुम मेरे लिए कोई इल्जाम न ढूँढो
चाहा था तुमे यही इल्जाम बहुत है
 
तेरा जिक्र ही कहाँ था ,
मेरी दास्ताँ छपने से पहले ,
तुझे अमर कर जाउंगा ,
मेरे मरने से पहले ।----रवि"अतृप्त"
 
कदें महक नी मुकदी फूलां विचों
फूल सुखदे सुखदे सुख जांदे


कोई कदर ना जाणे प्यार दी
दिल टूटदे टूटदे टूट जांदे


कोई मूल नी जग ते रिशतां दा
ऐ छूटदे छूटदे छूट जांदे


कदे प्यार नी मूकदा दिलां विचो
साँ मुकदे मुकदे मुक जांदे
 
जदों नी सी वल तुरणे दा
हर कोई चुकदा फिरदा सी
जिस दिन तू तुरणा सिखया
ठां ठां ते डिगदा फिरदा हां
 
एक चेहरे से ही फुरसत ना मिली हम को
हम किसी और की तरफ आँख उठाते कैसे
 
याद आते कभी तुम्हें हम भी,
हम भी काश इक वाक़िया होते !!
 
पलट के आने लगे शाम के परिंदे भी
हमारा सुबह का भुला अभी नहीं आया
 
यूँ ना झाँको गरीब के दिल में,
हसरतें बे-लिबास होती है !!
 
इश्क है अपने उसूलों पे अज़ल से कायम
इम्तिहान जिस का भी लेता है रियायत नहीं करता

अज़ल = Time immemorial (अनादि काल)
 
यूँ ना झाँको गरीब के दिल में,
हसरतें बे-लिबास होती है !!
बहुत बढ़िया सुभाष भाई | बहुत गहरी ओर सच्ची बात कह दी दो लाइन में |
 
मेरी आँखों में अब भी चुबता है,
तूने जो ख्वाब तोड़ डाला था !!
 
जिस नगर भी जाओ, किस्से है कम्बखत दिल के
कोई ले के रो रहा है, कोई दे के रो रहा है !!
 
मेरी आँखों में अब भी चुबता है,
तूने जो ख्वाब तोड़ डाला था !!

मेरी आँखों में अब भी चुबता है,
तूने जो ख्वाब तोड़ डाला था
लाख चाहा था की निकल फेकू
पर ख्वाब तेरा था जो मैंने पाला था
 
ऐसा बदला हूँ तेरे शहर का पानी पी कर,
झूट बोलूं तो निदामत नहीं होती मुझको

निदामत = खेद, अफ़सोस
 
अब आ गए हो तो बैठो वफ़ा की बात करें,
वफ़ा की बात मैं हर बेवफ़ा से करता हूँ !!
 
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