Yaadon Ke Pal

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Very nice, Divya ! Simply great !

Jab se mere dilbar ka paigaam aaya
dil mein armanoon ka ek tufaan aaya

Na jeete bante hai , na marte bante
mohabbat mein kaisa makaam aaya

Jis bhi rah se mein guzaroo chahe
har mod par uska he makaan aaya

Yu to hazaroon se hai milna julna
par lab par wahi naam,har shaam aaya

Ye mohabbat ke paigaam aur unki yaad
Lagta hai aaj koi qayamat hone waali hai


Koi meharbaan hai hum par zindagi ki tarah
Khushiyon ki aab to inaayat hone waali hai


Ek chehra dikhta hai chand se bhi haseen
Aaj chand ko bhi shikaayat hone waali hai


Dil dhadak raha hai bar-bar unke naam se
'Vijay' ko to aaj mohabbat hone waali hai
 
beautifully moving with this poetry...keep it going like that Sunita, Divya and Vijay....

Doston ko itna khubsurat likhte dekh
Aaj mujhe waqt par bharosa aaya


Likhte the jo dukh se bhari dastaan
Aaj unki kalam ne bhi khushi ka nazrana sunaya


Chahe kaho ye sirf panktiyan
Ya dil mein ho koi armaan jagaya


Ho shayad ye sacchi kahani
Kam se kam shabdon mein to dil muskuraya
 
Ek muddat ke bad YADON KE PAL mein bahar aayeee hai
Lagta hai yahan jaroor koi bahar nazrana lekar aayee hai


Kitne dino baad is fiza mein bahar aayee hai
Karte the jin lamho ka intezar vo aaj aaye hai
 
Ek muddat ke bad YADON KE PAL mein bahar aayeee hai
Lagta hai yahan jaroor koi bahar nazrana lekar aayee hai


Kitne dino baad is fiza mein bahar aayee hai
Karte the jin lamho ka intezar vo aaj aaye hai

Ye bahar jaroor kuch naya paigaam leke aayi hai
Uss paigaam ka izhaar karne ke liye hi ye aayi hai

Aap sab shaamil raho inn baharon ke mausam mein
Kya pata aap sabko bhi ye dene ko ek tauhfa laayi hai
 
Us chupi kiran ko paana, nayi umeed jagana
Dil ke aayene mein phir se ek tasver lagana
Gar hota itna aasan tute hue dil ka jud panna
Hum bhi seekh lete aaye din naye mehfil sajana


आईने में चेहरे बदलते रहते है वक्त के साथ साथ
लेकिन किसी दिल में बसी वो तस्वीर नहीं बदलती ।
किसी का दिल तोडकर चाहे लाख रंग बदले ज़माना
लोगों के बदल जाने से कभी तकदीर नहीं बदलती ॥

 
आईने में चेहरे बदलते रहते है वक्त के साथ साथ
लेकिन किसी दिल में बसी वो तस्वीर नहीं बदलती ।
किसी का दिल तोडकर चाहे लाख रंग बदले ज़माना
लोगों के बदल जाने से कभी तकदीर नहीं बदलती ॥

दिल मे बसी तस्वीर बदल कर देखो
तक्दीर से आगे निकल कर देखो
है सब मुम्किन इस दुनिया मे जनाब
ज़रा ज़माने कि तरह चल कर देखो
 
दिल मे बसी तस्वीर बदल कर देखो
तक्दीर से आगे निकल कर देखो
है सब मुम्किन इस दुनिया मे जनाब
ज़रा ज़माने कि तरह चल कर देखो

तसवीर का देखना भी कोई देखना होता है जनाब ?
अग़र हिम्मत रखते हो तो जरा तकदीर को देखो ।
मगर यार, तकदीर तो होती है ऊपर वाले के हाथ
इसलिए यारो, बंदे के जमीर या तदबीर को देखो ॥
वैसे जमाना तो है आजकल शमशीर रखने का ।
सो तेल, तेल की धार और तासीर को भी देखो ॥


(शमशीर = तलवार)
.
 
waah ustaad waah

bhaut khub,, likhtey rahiyey...:):)


तसवीर का देखना भी कोई देखना होता है जनाब ?
अग़र हिम्मत रखते हो तो जरा तकदीर को देखो ।
मगर यार, तकदीर तो होती है ऊपर वाले के हाथ
इसलिए यारो, बंदे के जमीर या तदबीर को देखो ॥
वैसे जमाना तो है आजकल शमशीर रखने का ।
सो तेल, तेल की धार और तासीर को भी देखो ॥


(शमशीर = तलवार)
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तसवीर का देखना भी कोई देखना होता है जनाब ?
अग़र हिम्मत रखते हो तो जरा तकदीर को देखो ।
मगर यार, तकदीर तो होती है ऊपर वाले के हाथ
इसलिए यारो, बंदे के जमीर या तदबीर को देखो ॥
वैसे जमाना तो है आजकल शमशीर रखने का ।
सो तेल, तेल की धार और तासीर को भी देखो ॥

(शमशीर = तलवार)
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दिल में जो तसवीर बसी है कैसे मिटा दोगे उसकॊ
हमने तो यहां बदलती हुई लोगों की तकदीर देखी है ।

वादा करके भी जो बदल जाते हैं ईस मतलबी दुनियां में
वक्त के साथ रंग बदलती ऊन लोगों की तदबीर देखी है ।

फ़लसफ़ा ज़िन्दगी का समझ नहीं आया अभी तक उनकॊ
किसी अनाडी के हाथ में चमकती हुई शमशीर् देखी है ।

दावा करते थे जो सिकन्दर कभी दुनियां को जीतने का
आज़ तॊ 'विजय' ने उनके हाथों में पडी ज़ंज़ीर देखी है ।
 
खयाली पुलाव

दिल में जो तसवीर बसी है कैसे मिटा दोगे उसकॊ
हमने तो यहां बदलती हुई लोगों की तकदीर देखी है ।

वादा करके भी जो बदल जाते हैं ईस मतलबी दुनियां में
वक्त के साथ रंग बदलती ऊन लोगों की तदबीर देखी है ।

फ़लसफ़ा ज़िन्दगी का समझ नहीं आया अभी तक उनकॊ
किसी अनाडी के हाथ में चमकती हुई शमशीर् देखी है ।

दावा करते थे जो सिकन्दर कभी दुनियां को जीतने का
आज़ तॊ 'विजय' ने उनके हाथों में पडी ज़ंज़ीर देखी है ।

हां, यह तो मैं भूल ही गया कि बात दिल की हो रही है ।
दिले नादान जो ठहरा, उसे फिक्र क्यूं मंजिल की हो रही है ॥


मंजिल कभी पास नहीं आती, उसे तो खुद पाना होता है ।
उसे पाने के चक्कर में पता नहीं कौन निशाना होता है ॥
मजनू बेचारे के पास न प्यार और न पैमाना होता है ।
खाली फिकरा - बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना होता है ॥
.
 
हां, यह तो मैं भूल ही गया कि बात दिल की हो रही है ।
दिले नादान जो ठहरा, उसे फिक्र क्यूं मंजिल की हो रही है ॥


मंजिल कभी पास नहीं आती, उसे तो खुद पाना होता है ।
उसे पाने के चक्कर में पता नहीं कौन निशाना होता है ॥
मजनू बेचारे के पास न प्यार और न पैमाना होता है ।
खाली फिकरा - बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना होता है ॥
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मन्ज़िल का क्या, मोहब्बत का सफ़र ही सुहाना होता है
इस मे तो जनाब दिल ही हमेशा से निशाना होता है
मजनू के पास लैला और कदमो मे जमाना होता है
इस दिवानगी कि बदौलत ही मशहूर अफ़साना होता है
 
Last edited:
मन्ज़िल का क्या, मोहब्बत का सफ़र ही सुहाना होता है
इस मे तो जनाब दिल ही हमेशा से निशाना होता है
मजनू के पास लैला और कदमो मे जमाना होता है
इस दिवानगी कि बदौलत ही मशहूर अफ़साना होता है

मोहब्बत के सफ़र पर चले हैं तो मंज़िल भी मिलेगी
चाहत की किश्ती का अब तूफ़ान से कोई वादा नहीं है ।
हमारी दीवानगी के आगे क्या करेगा ये ज़ालिम ज़माना
उनका भी वादे से मुकर जाने का कोई ईरादा नहीं है ॥
 
मोहब्बत के सफ़र पर चले हैं तो मंज़िल भी मिलेगी
चाहत की किश्ती का अब तूफ़ान से कोई वादा नहीं है ।
हमारी दीवानगी के आगे क्या करेगा ये ज़ालिम ज़माना
उनका भी वादे से मुकर जाने का कोई ईरादा नहीं है ॥
उसके वादो से बदकर कुछ जामाने मे नही
उस जैसा कोइ कही अपनो बेगानो मे नही
रस्मो-रिवाजो का डर हम दिवानो मे नही
अपने जैसी रवानी उन तेज तूफ़ानो मे नही
 
उसके वादो से बदकर कुछ जामाने मे नही
उस जैसा कोइ कही अपनो बेगानो मे नही
रस्मो-रिवाजो का डर हम दिवानो मे नही
अपने जैसी रवानी उन तेज तूफ़ानो मे नही


वादा-ए-मोहब्बत से ही तो महकती है ये ज़िन्दगी
किसी के नाम से ही तो दिल के चिराग जलते हैं ।
कौन फ़िदा ना हो जायें उनकी ऐसी दीवानगी पर
उनके हर वादे पर दिल में सपने हज़ार पलते हैं ॥
 
pyaar ke bharam me dil bhar ke jee
Unkee ankhon se dil bhar ke pee
dekhe jao umar bhar rahen unkee
jisne har kisi se bas bewafai hi kee

RK^2
 
pyaar ke bharam me dil bhar ke jee
Unkee ankhon se dil bhar ke pee
dekhe jao umar bhar rahen unkee
jisne har kisi se bas bewafai hi kee

RK^2
फ़ितरत से उसकी हम अनजान ना थे
इतने भी मासूम और नादान ना थे
अदा ही कुछ एसी थी जालिम की
वरना दिल के हम कभी गुलाम ना थे
 
फ़ितरत से उसकी हम अनजान ना थे
इतने भी मासूम और नादान ना थे
अदा ही कुछ एसी थी जालिम की
वरना दिल के हम कभी गुलाम ना थे

वॊ आये हमारी ज़िन्दगी में किस्मत की बात है
लेकिन उनकी फ़ितरत में शायद वफ़ा नहीं थी ।
वादा हम भी कर लेते साथ निभाने का ज़िन्दगी में
शायद उनकी किस्मत में लिखी कोई जफ़ा नहीं थी ॥
 
वॊ आये हमारी ज़िन्दगी में किस्मत की बात है
लेकिन उनकी फ़ितरत में शायद वफ़ा नहीं थी ।
वादा हम भी कर लेते साथ निभाने का ज़िन्दगी में
शायद उनकी किस्मत में लिखी कोई जफ़ा नहीं थी ॥

वो जो आज है इतने खफ़ा और जुदा से
हमने कभी चाहा था उन्हे बढ़कर खुदा से
हर नाज़ उठाते थे ,पलको पर बिठाते थे
अब तो रोज़ गिरते है वो मेरी निगाह से
 
my goodness......fundoo ........

jiski yaad mein hum saari raat ro liye...
savere uth te hi wo hava ho liye...
apne aansonon ke bhar bhar paimane humne diye..
par us besharam ne la pani uske chane bo liye.....:)

wah wah..jiyo meri jaan.....kidding.....just to have a smile.....

ab lo senti wala...

ishq mein kuch bhi buri niyat se socha nahi jata..
kaha jaata hai use bewafa, samjha nahin jaata......

kyon sahi hai..na......

ek aur...

koi deewana kehta hai koi pagal samjhta hai
magar dharti ki bechaini ko bas badal samjhta hai
main tujhse door kaisa hoon,tu mujhse door kaisi hai
yeh tera dil samjhta hai ya mera dil samjhta hai

mohabbat ek ehsaason ki paawan si kahani hai
kabhi kabira deewana tha kabhi meera deewani hai
yahan sab log kehte hai meri aankhon mein aansoon hai
jo tu samjhe to moti hain ,jo na samjhe to paani hai...

samandar peer ka andar hai lekin ro nahin sakta ,
yeh aansoo pyar ka moti hai isko kho nahin sakta
meri chahat ko dulhan tu bana lena magar sun le.
jo mera ho nahin paaya wo tera ho nahi sakta

bhramar koi kumudani par machal baitha to hungama,
humare dil mein koi khwab pal baitha to hungama,
abhi tak doob kar sunte the sab kissa mohabbat ka ,
main kisse ko hakikat mein badal baitha to hungama


Rakesh Kumar Grewal
 
koi deewana kehta hai koi pagal samjhta hai
magar dharti ki bechaini ko bas badal samjhta hai
main tujhse door kaisa hoon,tu mujhse door kaisi hai
yeh tera dil samjhta hai ya mera dil samjhta hai



samandar peer ka andar hai lekin ro nahin sakta ,
yeh aansoo pyar ka moti hai isko kho nahin sakta
meri chahat ko dulhan tu bana lena magar sun le.
jo mera ho nahin paaya wo tera ho nahi sakta

Very nice, Rakesh.
 
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