ravinderjeet
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एक बे म्हारे गाम में एक छोरी का बियाह था एर ऊ छोरी का बाबू एर माँ दोनु हेडमास्टर थे | उनने बड़ा तगड़ा बियाह कर्या | बरात घणी बड्डी थी जो दिली तें आई थी | ऊमे तीन चार बस ९०-१०० कार होंगी हामने इन्नी बड्डी बरात कदे भी ना देखि थी | २ बस बाजे आलयाँ की थी जिनमे ३०-४० तो हंडे आले थे जो आगे -आगे सर पे धर कें चालन लागरे थे | हाम भी पोंच्गे बियाह देखण| म्हारी गाल के १०-१२ बालकां का जत्था था(वे-ए जो आडू तोडंअन जाया करते ) | बियाह आलयाँ ने हाम भीतर ना बड़अन दिए ,जित एक बड़े से घेर में वो बियाह होणा था | म्हारे छो उठ्या एर गाम के बाहर ट्रंअंसफार्मर लाग्र्या था| हाम ने उका हेंडल गेर दिया(जब म्हारे गाम में सब स्टेशन ना बनर्य़ा था लोढ कम था ) | सारे गाम की बिजली गुल हो गी | फेर उनने बाकी का बियाह उन् हांडया के चानण्ने में -ए करना पड्या जो बाज्याँ आले लयारे थे |