albaadi baalkaan key kissey.

एक बे म्हारे गाम में एक छोरी का बियाह था एर ऊ छोरी का बाबू एर माँ दोनु हेडमास्टर थे | उनने बड़ा तगड़ा बियाह कर्या | बरात घणी बड्डी थी जो दिली तें आई थी | ऊमे तीन चार बस ९०-१०० कार होंगी हामने इन्नी बड्डी बरात कदे भी ना देखि थी | २ बस बाजे आलयाँ की थी जिनमे ३०-४० तो हंडे आले थे जो आगे -आगे सर पे धर कें चालन लागरे थे | हाम भी पोंच्गे बियाह देखण| म्हारी गाल के १०-१२ बालकां का जत्था था(वे-ए जो आडू तोडंअन जाया करते ) | बियाह आलयाँ ने हाम भीतर ना बड़अन दिए ,जित एक बड़े से घेर में वो बियाह होणा था | म्हारे छो उठ्या एर गाम के बाहर ट्रंअंसफार्मर लाग्र्या था| हाम ने उका हेंडल गेर दिया(जब म्हारे गाम में सब स्टेशन ना बनर्य़ा था लोढ कम था ) | सारे गाम की बिजली गुल हो गी | फेर उनने बाकी का बियाह उन् हांडया के चानण्ने में -ए करना पड्या जो बाज्याँ आले लयारे थे |
 
मै छोटा था और पहले दिन सरकारी स्कूल में जाऊ था घरक्या ने चवन्नी दे दी मन्ने उसकी एक पिपनी ली ! काना मास्टर होया करता स्कूल में आर वो कुर्सी के टेक ला के सो गया ! सारे बालका ने उधमस तार दिया मन्ने भी अपनी पिपनी काढी आर मंड गया उस्ताद बिस्मिल्ला खा बन के ! मास्टर की नींद उचट गयी अर उसने मेरे दो रेह्पते धरे में अपना झोला झाला बगा के पार ! घर आते ए साथ ताऊ ने लेके पहुँच गया मास्टर की खिंचाई करवान अर उस दिन पाछे कदे सरकारी स्कूल में नहीं बड़ा !

thaare gaam me private school to thaa koni. fer ke Madiney padhan jaawan laagyaa.ak unpadh rahgyaa.
 
1 bar mare padossi ne ganne ka kollu la rakhaya tha aar uske chore pe sare madam master ras mangvaya karde. usne tang aake ras me mittha sodda mila diya. sare madam master bajdde phire usdin k bad kadde ras ni mangvaya.

maastraan gelyaa to nui karni chaahiye. kimmey padhaandey to sein koni khaam khaa haam bigaad aur diye.
 
म्हारी गाम की पंचायत भवन म्हारी प्राइमेरी स्कूल धोरे सै हाम स्कूल के ग्राउंड म खेला करते किरकेट | इब घरा जाण का टेम होया जिब एक सेब आला आग्या | हाम ६-७ जणे सब तै पाछे जाया करते तो एक जणे क ध्यान म आई आक पंचायत भवन के जंगले खड़े सरिया के है हाम पोह्चे आर एक सरिये क तिन चार जणे चिपटे तरले बळ न तो वो सरिया मुड़ग्या बिच म्ह तै, आर थोडा सा उसने घुमाया तो वो एक बळ तै लिकडग्या फेर हमने वो खीच के काढ लिया, तो हमने न्युए दो सरिये काढ़े आर सेब खाए | इब हाम हिलगे ओड़े आर रोज के २-३ सरिये काढ लेवा थे आर कुछ न कुछ खाया करते | आर हामने ७-८ दिन दिन म दो जंगले साफ कर दिए | आगले दिन तीसरे जंगले क लागे ए थे अक पकडे गये, म्हार तै ५-६ साल बड्डा एक छोरा आग्या वो बोल्या मै बताऊंगा गाम म | हाम डर्गे हामने वो प्यार तै समझाया वो मान्या कोणी भाई , म्हारे धोरे कोई दूसरा उपचार बी कोणी था हमने वो गेर के भुंडी ढाल तोड्या जिब वो करण लागग्या छोड़ दयो मन्ने मै की ए न कोणी बताऊ फेर गया वो कुल्लाता | ना तै उने कदे या बताई की इनने जंगल्या के सरिये काढ़े सै आर ना उने कदे या बताई आक बालका न मै काट्या | हामने बी वे सरिये कोणी काढ़े फेर |
 
हाम तीन दोस्त एक्के गाल के एर हान के सां | ऊन में तें एक सुरेंदर जीने छोटा था जब आपनी गिहूँआ की गाडी में आग लायी थी एर दूसरा नरेंदर उनके ट्रक्टर था एर चालीस किल्ले थे | में तो पढ़न मुंबई आग्या था एर वे दोनु गाम में थे | नरेंदर हर के घरां में एक उकी विधवा ताई थी | वा रोहतक रह्या करदी एर रोज़ ट्रक्टएर ले कें गाम में आ जांदी | ऊके १० के लोवे धोरे किल्ले थे | पहलम तो वा ठेके ने दिया करदी पर २-३ साल तें आप बोवण लागी थी | एर २-३ साल में -ए वा बदनाम भी हो ली एक जीत्न्ना कहेवे उतनी मजदूरी ना दिया करदी, के किम्मे हो ओडडा मार कें अक फेर दे दूँगी एर मजदूरां नु आगे पाछे हंडआये जांदी | ऊके देवर का छोरा भी उने साझी राख्या पर ऊके भी पीसे मार गी | एर कोए लड़ान लाग जांदा तो आपने दामाद का रोब दिखांदी (उका दामाद कित्ते पुलिस कमिश्नर था ) | ते भाइओ के होया अक गाम के कमीन- कांदु ऊके काम करण तें नाट्गे | एर फसल खड़ी खेताँ के माँ , तो उने सुरेंदर एर नरेंदर ते ठेका कर लिया अक जो भी फसल होगी उका ५० % दे दूँगी तम आपने जिम्मे पे मजदूर ले आओ | जब सारा काम हो लिया एर ताई ने उन ताहि रंग दिखाने सूरू कर दिए अक तमने यो काम ठीक ना कराया एर वो काम ठीक ना कराया | थारे इन्ने पिस्से कोणी बण दे | उन ने तो भाई दोनुआ ने रात ने ला कें २ ट्राली उकी हेली में (रात नु उड़े कोए ना रह्या करदा ) एर भर कें गिंहू तडके -तड़क जा बेचे रोहतक मण्डी में | भाई वा ताई पागलां की ढाल हंडे बाल खिंडआए |
 
म्हारा स्कूल "शिक्षा भारती" गोहने रोड पे सेहर ते ५-६ Km दूर होया करता .....तो हम जब भी स्कूल ते बंक मारया करते तो लिफ्ट मांग क सुख्पुरे चौक तक पहुंचा करते! तो एक दिन नुए बंक मार क रोड पे आके खड़े होगे लिफ्ट मांगन ताई....तो स्कूल की बस आगि .....हमने सोची की बस दुसरे स्कूल में जाती होगी (mhare school ki 2 branch thi, ek boys wing or doosri girls wing)तो इसमें ए चल पड़े हैं ....तो मांग ली लिफ्ट और ड्राईवर ने फट गाडी रोकी और हम ४-५ जने चढ़ लिए ! भीतर बड़े ते देखा ...प्रिन्सिपल, वाईस-प्रिन्सिपल, कमिस्ट्री आला, फिजिक्स आला, मैथ आला और पीटीआई सारे बठे ! और आगले ऐ मोड़ ते गाडी घुमा ली स्कूल में वापिस अर्र फेर पीटीआई ने ground के १० चक्कर कटवा दिए अगस्त के महीने मै ...अर्र म्हारी सब की पाँख सी पाट गी ! और प्रिन्सिपल ने सब के घर लैटर भिजवा दिए ! उस दिन पीछे कदे भी स्कूल की बस में लिफ्ट नहीं मांगी! जिस दिन भी बंक मारनी होया करती अपनी साइकिल ने खेत में लुको आया करते!
 
मन्ने उनिवार्सिती कोलेज में नया -नया दाखला लिया था | उड़े थोड़े दिना में कई दोस्त बनगे | उनने बताई अक आड़े किताब चोरी हो जयां सें, संभाल कें राखिये | तो मन्ने किताबां पे कई जगहाँ निशाँ बणा दिए अक चोरी हो भी गई तो पिछाण में आज्यांगी | एर भाइओ २ मिन्हा भीतेर मेरी एक फिजिक्स की महंगी आली किताब किस्से ने ठा ली लाइबरेरी माँ तें ( लाइब्ररियन किताब बाहर टेबल पे धरवा दिया करदा )| जब हाम ने लाइबरेरियन पे बुझी तो ऊने बताई अक दो रफुजियाँ के छोरे आड़े खड़े -खड़े निगाह मारण लागरे थे एर जब मन्ने टोके तो वे एक किताब ठा कें बाहर चाले गए |लाइब्ररियन भालोठ का एक फोगाट था एर वो नु बोल्या अक फेर वे दिखे तो में बता दूंगा तम आंदे जांदे रहियो | में डर भी घणा रह्या था, एक तो मेरा बाबू फोजी ,ऊने बेरा पाट ग्यातो सूड़ तार दे गा | तीन चार दिन पाछे फोगाट ने इशारा कर कें बता दी अक ये थे | मन्ने एर मेरे दोस्ताँ ने उपे नज़र राखनी सुरु कर दी एर एक दिन फिजिक्स की घंटी में जब उन् माँ तें अक छोरे धोरे वा किताब दिखी एर मन्ने किताब धोरे आकी देखन की कोशिश करी तो उनने वा किताब लुको दी | मेरा शक पक्का हो ग्या एर मन्ने मेरे दोस्ताँ ताहि बता दी | हाम ने पलान बनाई अक जब सांझ के कोलेज छूटें पाछे इन्ने बाहर घेराँ गे एर हाम नु दिखा कें अक महारा उन् पे ध्यान कोणी एर हाम एक घंटी पहलाम फील्डिंग ला कें खड़े होगे | वे मडिकल मोड़ कानी ओटडे फूट रे थे न्यून के लिकडअन लागे तो हाम ने वे घेर लिए | एर वे नाट गे अक या किताब चोरी की कोणी म्हारी से | जब मन्ने सारी पिछाण बताई वे नु की नु पा गी तो हाम उनने उडे एक कंटीन जो खाली पड़ी थी ऊमे लेगे एर उनकी सारी किताब खोस ली दोनुआ की एर धमकाए अक परंसिपल ताई बतावां गे | मेरी किताब मन्ने मिलगी एर उनाली सारी किताब हाम ने प्रेम बुक डिपो परताप चोक पुराना बाजार में जा कें बेच दी | फेर हाम ने सारयां ने मिल कें उन् पिस्स्याँ की कई फिलम देखि |
 
म्हारा स्कूल "शिक्षा भारती" गोहने रोड पे सेहर ते ५-६ Km दूर होया करता .....तो हम जब भी स्कूल

FANSH GE MAGARMACHHAAN KE JAAL ME . FER GHARAAN TERE BAABU NE TERE GOLAA LAATTHEE NI DI .
 
मने से किरकेट का शौक घना | मेरे ढ्बी भी इसे शौकिया थे | एक बे हम ७-८ जने स्कूल ते बंक मार के पुलिस लेन के ग्राउंड में चले गए खेलन | खेल-खाल के हमने ३ जन्या ने सोची के रे चलो सोम के समोसे खा के आवेंगे | मैं अर मेरे दो दोस्त विक्रम अर कुलवंत चले गए भाई उड़े समोसे खाण | भाई समोसे खावे ए थे के इतने में कुलवंत का बाबू आ गया उड़े के | उसने अपना छोर्रा देख के फट स्कूट्री रोकी अपनी | म्हारे धोरे आ के बोल्या के रे आड़े के करो सो? स्कूल में नहीं गए ? (टैम भी ११.३० - १२ के लोवे ऐ होया था ) छुट्टी की भी नहीं कह सके थे, क्यों अक छुट्टी १.३० बजे होया करदी म्हारी |
भाई डरते के कुलवंत के मुह ते लिकड़ गया के म्हारी मैडम में मगवाये थे सोम के समोसे जय ते लेन आ रहे से | ऊ का बाबू कित माने था बिठा लिया वो कुलवंत स्कूट्री पे एर बोल्या चाल स्कूल में , बुझ के आऊंगा | मैडम ने समोसे मंगवाए हो तो हाँ भरे| ;)
मैडम ते बताई ऊ के बाबू ने के २ बालक और भी थे जी ई की गेल | पर म्हारे नाम ना बताये कुलवंत ने |
उस कुलवंत का करडा सूड़ उतरा उस दिन | उस दिन पाछे कदे समोसे खान नहीं गया वो म्हारी गेल |;)
 
म्हारा स्कूल "शिक्षा भारती" गोहने रोड पे सेहर ते ५-६ Km दूर होया करता .....तो हम जब भी स्कूल

FANSH GE MAGARMACHHAAN KE JAAL ME . FER GHARAAN TERE BAABU NE TERE GOLAA LAATTHEE NI DI .

Baabu te gola lathi jab de ga na jab letter milega....itne saal school mei padhai thodi e na kari thi....;)
 
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