वो जो आज है इतने खफ़ा और जुदा से
हमने कभी चाहा था उन्हे बढ़कर खुदा से
हर नाज़ उठाते थे ,पलको पर बिठाते थे
अब तो रोज़ गिरते है वो मेरी निगाह से
अब क्या खफ़ा होना किसी अजनबी शख्स के लिये
वो हमें मिला ही कब था जो कहें कि ज़ुदा हो गया |
जिसकी अपनी कोई पहचान नहीं थी इस ज़माने में
हमने उनसे मोहब्बत क्या की वो तो खुदा हो गया ||