albaadi baalkaan key kissey.

जब में मुंबई में पढ़न लाग्र्या था | तो जब गाम में जांदा गर्मियां की छुट्टियां में तो घर के काम तो करने -ए पड्या करदे |में एक दिन साइकल पे खेताँ माँ तें बिर्सम का भरोटा धरे आवन लाग्र्या था | साइकल माड़ा सा पराणा था, तो वो चाल्दी हान चूँ--चर्र ,चूँ -चर्र करे था ,जब म्हारी गाल धोरे सी आ लिया तो में उतर के देखन लाग्या ,अक के बात स, यो इतना चर्र-चर्र क्यों करे से | जब्बे एक बालक की आवाज आई " क्यों लोहा खींचे हंडे स , ई का नूण बदलवा ले ने" | मन्ने देखा अक इस्सा कूण से | वो बालक हान्ग्या सी ३-४ साल का रह्या होगा ,कद का भी घणा छोटा ,एक खाली सा झोला लटका ऱ्या था काँधे पे | एर साइकल के गेल नु खडया हो के बिर्सम नु खीचन्न लाग्र्या | मेरे पिछाण में तो कोणी आया ,पर वो म्हारी गाल का भी कोणी था | में बोल्या " आरे भीन्च्नी सा तू तो घणा बोले स " | वो नु बोल्या " सूर -सर बोल ,तेरा काका लागू सूँ" | मेरा हान्स -हान्स के पेट फूट ग्या | एर ऊ छोरे के मूंह पे कोए भाव नि | अक यो ओड बड्डा तेरे मार दे गा ,या छो में आवेगा | कती ऊ सुरेंदर शर्मा की ढाल बोत्डी सा मुंह बना कें खडया रहा | आज भी वा घटना याद आ जावे से तो फेर में हांसन लाग जाऊ सु | आंडी छोरा |
ravinder jee, maine te wo koi bhoot-bhaat lage se, saari baat dubare t yaad karke socho.
 
[मेरे बड्डे दादा का छोट्ला छोरा मेरा काका थानसिंह ( जिह की सानी में मन्ने गार्या रलाई थी , एर जिह के बाजरे के डाम्चे के मन्ने जेवड़ी बाँध के मुफ्त में डिब्बे बज्वाएय थे ) वो-ए काका थान सिंह | ऊ का एर मेरा बैर सा होरा था | वो काम चोर था | ऊ का बड़ा भाई सिख था ,वो गुरदवारयाँ में पड्या रह्या करदा | यो किम्मे उलटा काम कर देंदा तोह ,मेरी काकी मेरे बाबु तह केंदी , अक रमिंदर(वा मन्ने नु-ए कह्या करदी ) के बाबु एक बे इह के काका ने धमकाइये | मेरा बाबु बड़ा था ,जयां तें ऊ की जिम्मेदारी थी | एर जा वो महारा किम्मे नुक्सान कर देंदा ,एर मेरा बाबु धमका देंदा तोह मेरी काकी लड़न आ जांदी , अक तम तोह म्हारा घर उजाड़ना चाहो सो थारी नजर धरती पे स( किब्बे-२ वो घर छोड़ के भज जाया करदा) | तोह म्हारा
किम्मे नुकसान कर भी देंदा ,तोह मेरा बाबु ना धम्कान्दा अक खाम खा सर हो ज्यां गे |
म्रेरे बाबु ने मेरी ड्यूटी ला राखी थी, अक स्कूल की छुट्टी पाछे रोज खेताँ में जाणा, एर आधे पट्टे का हरया (खरपतवार ) पाड्न्ना | उने में ,म्हारे कोठड़े के सहारे, नाली में कट्ठा कर कें गेर आया करदा, एर फेर मेरा बाबु उने ठा लायान्दा | योह कामचोर काका , सांझ नु ,जब में चल्या जांदा घरां ,तो आपने रह्डू में मेरा पाड्या होया हरया गेर कें डाकां आंदा | मेरे बाबु ने में धमकाया भी, अक तू हरया कोणी पाड़ कें आया ,झूठ बोले स | तोह मन्ने उनके गंडासे धोरे पड्या होए हरया दिखाया ,अक यो काम इस्से का कर्या होड़ स, एर यो तो सारा दिन कोठड़े में सूत्या पड्या रह स ,ईपे बूझो इनने कद हरया पाड्या | पर सिद्ध करें पाछे भी राड़ के डर तें ,मेरा बाबु थानसिंह तें किम्मे कोणी कंदा |मन्ने थान सिंह तें बदला लेवन की पलान बनाई अक यो जित भी फंस्ग्या उथे-ए इह तें बदला लेणा स |
म्हारा रात का ओसरा होया करदा जाड्यां में पानी का | १.५ घंटा थानसिंह का पहलम एर १.५ घंटा म्हारा पाछे | मेरा बाबु दिन में नाके -बंधे कर जाया करदा जुकर में कम तें कम हांगे में काम कर सकूं (जब में ११-१२ साल का था, एर मेरे बाबु की रत की शिफ्ट होया करदी )| थानसिंह की आदत थी अक वो लुगाई के (मेरी काकी ) के डर तें पानी पे तोह आ जांदा पर कदे थम्ब -डोली कोणी दिया करदा खेत में ,एर एक नाके पानी दिया करदा | एर किल्ला जिन्ना भर जांदा उतना-ए बाह के बो दिया करदा | उअह के कई किल्ले आये साल बिना बोये रह जांदे | तो एक रात वो आपना पानी काट कें ,एर जा सोया कोठड़े में | उनने बेरा था अक रविंदर टेम पे आवेगा, एर आप काट ले गा ,एर वारी आया तो उसका फेदा था | में तोह बदले के चक्कर में था, एर ऊ की गेल की गेल पोंच लिया खेत में, एर जुकर वो कोठड़े में जा कें सोया ,मन्ने पानी तोड़ दिया | म्हारे खेत माडे ढल्मा पड़े थे | ऊका २०-२५ खाट वारा में हांडया होया पाणी भी उतर के म्हारे खेत में आ लिया | एर डेढ़ घंटे पाछे में भी कोठड़े में जा कें, मेरे काका नु ठा कें बोल्या ,अक काका में आ लिया, एर पाणी काटू सूँ , मेरा काका बोल्या ,ठीक स कट ले | एर फेर जा बताई अक पाणी तोह पहलम तें -ए टूट रया स | तडके-तड़क फेर मेरी काकी ने धर कें लिया धार पे थानसिंह , एर निरी गाल बाकि थान सिंह ताहि | योह काण्ड मन्ने दो बे दोहराया थान सिंह गेल, फेर मेरी काकी ऊह की गेल मजदूर खंदान लागी ,जब उह का पेंडा छुट्या मेरी अल्बाद तें |

रविंदर जी, काका बेसक कामचोर था, पर यो त आपका talent था अक इसे कामचोर काका प अपने खेत की चिड़िया बी उडवा ली , अर आप रोला- रोला मचान में साध गे! दिमाखदार कामचोर!!!!!
 
yaar ravinder, jaat to bahut dekhe, par tu sach main jaatoon ka sardar hai.

Bahut badiya.....

Ek din bahut badi cheez banega tu...
 
रविंदर जी, काका बेसक कामचोर था, पर यो त आपका talent था अक इसे कामचोर काका प अपने खेत की चिड़िया बी उडवा ली , अर आप रोला- रोला मचान में साध गे! दिमाखदार कामचोर!!!!!

सुदेश जी , आप ते बात नु पकड़ गी | मेरे नाना जी कह्या करदे "वे श्याने जो मकान बनावें ,अर वे महाश्याने जो उनके बनाए होया में रहवें "|
 
इबके गाम में गया ते घेर में बैठना अर सोणा पड्या | दुर्घटना के कारण मेरे दो भाइयां के चोट लागरी थी ,उनकी सार संभाल खातर में उन्ने धोरे कई दिन सोया | वो घेर मेरे काका थान सिंह के बांडे में आर्या स , ते मेरे एक पुराणी अल्बाद याद आगि | पहलम जब हाम छोटे थे तो उह घेर के सामी एक खोड़ होया करदा (खोड़ = हिंदी के खोह का अपभ्रंश ,यु एक जाल का रूंख था | जिह में ६-७ फूट उंचा अर ७-८ स्केयर फीट की गोलाई में खोह थी ज्यां ते-ए इहने खोड़ कह्या करदे )|हाम सब इह खोड़ के मंहा बड़ के खेल्या करदे | यु खोड़ जित था उह तें ५० मीटर आगे जा के म्हारी गाल ख़तम हो जा थी अर उड़े-ए भीत्र्ल्याँ (एक पान्ना ) की भी गाल ख़तम हो जा थी | भित्र्ल्याँ का एक घेर था उड़े | इब्ब उह ,माणस का नाम याद कोणी जिनका घेर था पर उह्न्ने पहलवान कह्या करदे | मानलो धारे पहलवान भित्र्ला | उनके घेर में कई कुत्ते रह्या करदे | उनमे एक घणा कसुता पाडना था | अर हाम कदे उनकी गाल कानी जांदे तो कसुता पाडन भाज्दा | म्हारी गाल के कई बालक अर कुत्ते उहने पाड़ राखे थे | एक दिन हामने पलान बनाई अक इह कुत्ते के क्यूकर मार्या जा | हामने वो खोड़ में रोक के छेतन की पलान बनाई | अक हाम उह के मार भी सकां अर वो हामने पाड़ भी ना सके | उह खोड़ में कई छोटे-छोटे मोघे भी थे | पर दो मोघे बड्डे थे जिन में के हाम बड्या लिकड़या करदे | हामने एक मोघा ते जेवडी पूर के ने बंद कर दिया अर दुसरे खातर उड़े एक पाथर की सिल्ली पड़ी थी उह ने घशीट ल्याए अर उह मोघे के सहारे खड़ी करदी अर दो जन्या की डुटी ला दी अक कुत्ता बड दे-ए वा सिल्ली धका के ने अडा देणी स | हाम ने लांबी-लांबी लाकडीयाँ के आगे तारकोल ला के उह में हींश(एक काण्डयाँ आला रूंख ) की शूल गाड़ दी थी अर इस तरा भाले तयार कर लिए थे | सुरेंदर आपने घर तें चार -पांच रोटी चोर लाया अर हाम पोंचगे उह शेर कुत्ते धोरे | पहलम ते हामने वो पाडन भाज्या पर हामने टूक बग़ा दिए उह कानी तो वो बोल बाला खावन लाग्या अर खा के ने फेर म्हारे कानी लखाया अक और दे दो | फेर हाम उह ने टूक गेर्दे-गेर्दे उह खोड़ ताहि ले आये अर खोड़ में दो रोटी और धर दी | कुत्ता खुश हो के ने बड गा अर बेठ के ने लाग्या जीमन | म्हारी रिजर्व पलाटून ने वा पाथर की सिल्ली अड़ा दी इतने दुसरे मोघे के आगे | अर फेर हामने म्हारे उन् भाल्याँ ते अटेक कर दिया उह कुत्ते पे | वो उछले अर मिमियावे अर हाम मोघ्याँ मांह के उह के गाभा-गभ शूल बिठान लागरे | वो घणा भुंडा घायल अर लहू -लुहान कर दिया | फेर उड़े एक बुड्ढा था उह ने म्हारे ताहि गाल बाकि उह कुत्ते का रोला सुन के तो हाम उड़े तें भाज गे | फेर बेरा ना किः ने वो बाहर लिकाड्या | पर फेर इसा होया अक उह्का शेर पणा ख़तम हो ग्या अर घायल अवस्था में कई कुत्त्या ने भी आपणे बदले तारे | दो मिहना में उह का इह धरती पर का कार्यकर्म ख़तम हो गा अर म्हारी गाल के कुत्त्याँ ने अर बालकां ने चेन की सांस ली | अल्बादी बालक ,शहीद कुत्ता |
 
मेरा काका कँवल सिंह घणा अल्बादी था( इब्ब ते बुढापे में सुधर गा |बोल-बाला आपनी पेंसन खावे स )|जब सिक वो स्कूल में पढ्या करदा ,घन्खरे मास्टर अर खासकर भेंजी पंजाबन होया करदी | जब सी के बालक सब मूंछ अर ड़ाढीयाँ आले होया करदे अर लगभग आध्याँ के तो बियाह भी हो जाया करदे अर कईयाँ के बालक भी होया करदे |एक दिन मेरा काका सकूल में ना गया ते आगले दिन उनकी मास्टरनी ने बुझी अक कँवल काल क्यूँ नहीं आया | कँवल बोल्या अक जी म्हारी मेन्ह्स बया गी थी अर काटडी दी स | भेंजी बोली ठीक स कोए बात ना | आगले हफ्ते वो फेर एक दिन ना गया | फेर भेंजी ने बुझी तो वो बोल्या जी इबके म्हारा खागड़ ब्यागा अर बह्ड्का जाम्या स ,भेन्जी किम्मे समझी-ए कोन्या | सारे बालक हान्स पड़े ते भेन्जी के शक होग्या ते वा बोली अक तम क्यूँ हांसे सो | मेरा काका बोल्या अक जी खागड़ सब के कोणी होया करे कोए-कोए राख्या करे, ये ज्यां तें हांसे सें | थोड़े दिना पाछे फेर वो ना गया | इबके फेर भेन्जी ने बुझी ते वो बोल्या अक जी म्हारा बिटोड़ा ब्यागा अर बिटोडि दी स इबके | फेर सारे बालक हान्स पड़े ते भेन्जी के पक्की जँच गी अक यु किम्मे गलत सलत बोले स | वा बोली अक सच-सच बताओ क्या बात हे | मेरा काका बोल्या अक जी साची बात स ,चाहो तो ताजे-ताजे गोस्से खावन ने ल्या दयूं | बितोड़े के पहले दिन के दूध तें बणाया करें | बालक फेर हान्स पड़े | वा जा के ने हेडमास्टर ने बुला लाइ | हेडमास्टर कोए जाट था | उहने सुणि ते ,उहने मेरे काका के घाम में कान पकडवा दिए आपने ओफ्फिस के सामी |अर दो घंटियाँ पाछे छोड्या |जाट ते बेरा ना क्यां ने ब्य्वा दें |
 
म्हारी गाल में एक था नसीब | वो मेरे काका हर के हाण का था अर २४-२५ साल का था जब एक रोड अक्सिडेंट में मर भी गया था | वो माडा कामचोर था | बहाने करें जाया करदा काम तें बचण के | एक बे उह के बाबू ने उह ताहि खेत में किम्मे काम कर के आण ताहि कही ते वो बोल्या अक उह के ओले पाँ में चंनक (मोच )आरी स अर आपणे बाबू ताहि लंगडा-लंगडा के चाल कें दिखा दिया | उह का बाबू उह की दादी ताहि छोरे का पाँ सेंखन की कह के ने खेताँ में आप चाल्या गया | अर बाबू के जांदे-ए नसीब लाग्या बालकां में खेलण | जब दोफारी सी में उह का बाबू आया ते उहने वो दूर तें-ए देख लिया अक इह के ते किम्मे भी ना होर्या | नसीब ने आप्णा बाबू कती लव आ लिया जब देखा अर फेर लंगड़आण का नाटक करणं लाग गया पर कुनसे पाँ में चनक आ ऋ स न्यू भूल गा | अर वो इबके सोले पाँ तें लंगडावे था | फेर उह के बाबू ने काटया वो गेर के ने | चोरी खातर भी अक्कल चाहिए |
 
काल भींत में एक चोभा गाडु था | जब या एक मेरे सहपाठी की अल्बाद याद आगि | इब्ब उह का नाम ते याद कोणी | वो म्हारे तें ५-६ साल बड्डा था अर जब हाम छट्टी में पढ्या करदे | उह के ढाढी मूंछ आरी थी अर उह के हाण के बालक दशमी में थे | उह भाई की ड्राइंग भोत बढ़िया थी जो उह ने आपे सीखी थी ,सब सराहा करदे | वो मिमिक्री का भी भोत बढ़िया कलाकार था |एक म्हारी भेंजी होया करदी श्र्नार्थन,वा रोहतक तें पढ़ान आया करदी | उह का नाम भी याद कोणी पर उहने सब "ग्याभी" कह्या करदे | यु नाम भी इस्से छोरे का धरया होड़ था उह भेंजी का | वा सारी हाण साडी बाँध के आया करदी | हामने कदे वा सूंट पहरे कोणी देखि | एक बे जाड्डयाँ के दिन थे अर स्कूल की घन्खरी क्लास बाहर घाम में लाग री थी | उह छोरे ने उह भेंजी की मुंह लको के मिमिक्री कर दी अर भेंजी ने वो देख लिया | उह मुछअड़ सहपाठी के उह भेंजी ने कई डंडे मारे | उड़े और भी कई क्लास लागरी थी नोमी अर दशमी की | जब म्हारे गाम में छोरियां का आठ्मी ताहि का-ए न्यारा सकूल था | नोमी दशमी में को एजुकेशन थी | गाम की छोरियां के आगे कलाकार छोरे की बेजती कर दी थी , भेंजी ने | उह घटना के कई दिनां पाछे की बात स | वो बेरा ना कोड बे सी उह की कुर्सी धोरे जा के बेठ्गा अर जब वा पढ़ान में मगन थी जब उह की साडी के पल्लू के एक चोभा गाड़ आया | जब वा भेंजी पढ़ा के ने उठी ते उह का पल्लू कती तले ताहि खुल्गा अर उह के हाथ की किताब भी ढह पड़ी | कच्चे में चोभा गड्या होणे के कारण झटका लाग्दे-ए तावाला-ए पाट गा , अर और किम्मे घणा नुक्सान भी कोणी होया , अर भेंजी के किम्मे समझ में भी कोणी आया अक यु होया क्यूकर | पर जब पाछे वा भेंजी उह कलाकार ने कई बे सताई | अल्बादी कलाकार |
 
इबके जब गाम में गया ते , किम्मे बात चाल री थी ते मेरी काकी ने या घटना याद दुवाई,में ते भूले ग्या था | जब मेरी बडली काकी दुस्सर ल्याई, ते जब बगड़ में खाटआँ पे सारी तीळ बिछा के ने दीखान का रिवाज था | आज काल ते केरा ख़तम हो लिया |सब के न्योंदे जाया करदे अर लुगाई जत्थे बणा -बणा के ने गीत गांदी आया करदी तीळ देखण खातर |मेरी बुआ अर मेरी दादी, सब ने बतावें अक या तील इह खातर , अर या इह खातर| सारे मरद माणसां खातर भी काम्बल अर के फेर चादर थी | में चार पांच साल का था अर मन्ने न्यू बेरा पाट लिया था , अक में भी मरद-माणसआँ की श्रेणी में-ए आऊं सूं | मेरी खातर किम्मे ना ,कोए जीकर नहीं |मखा सब खातर किम्मे ना किम्मे स अर मेरी घर में किम्मे गिणती-ए कोणी | मन्ने मेरी दादी पे बुझी अक मेरा के ?,ते मेरी दादी बोली छोटे-छोटे बालकां का ना होया करे | पर किम्मे एक आध लत्ते का टुकडा भी दे दिया करदे ,बालकां के नाम का ,पर मेरे इस सारी कवायद में किम्मे ना मिल्या | मन्ने जब लुगाई-पताई जा ली ते एक चादर आपणे नाम की ठा के आपे लुको क्र धर ली | इब्ब मेरी दादी हान्डे गिनती करदी , अक "आये-हाय चादर ठा ले गी कोए अन्पुती | थारा नाश जइयो, कुण थी वा खसम-खाणी "| जब या आम बात थी अक नजर चुरा के तीळ चोरी हो जाया करदी |सारी गाळ में बात फेल गी एक कोए चादर ठा ले गी | अर कई इस्सी-इस्सी लुगाइयां के नाम बाहर आवण लागे जो इस्से-इस्से काम करया करदी | अर फेर बेरा पाड्या जावण लाग्या अक वा आई थी के किहे ने देखि हो | पर किहे के नाँ पे पक्का कोणी होया गया अक किः ने चाद्दर चोरी स | मेरे पे रुक्या ना गया अर में ते उस्से रात ने आपणी चाद्दर ने ले के ने, छात पे जा सोया खटोले पे , ओढ़ के ने नई चाददर ने | रात ने ते बेरा ना पाट्टया अँधेरे में , पर तडके-तड़क चोर पकड्या गया चाददर समेत छात पे सुत्त्या | आपणा हक्क जा ना मिले ते खोश लेणा चाहिए |हकीकी चोर |
 
म्हारी गाल में एक था नसीब | वो मेरे काका हर के हाण का था अर २४-२५ साल का था जब एक रोड अक्सिडेंट में मर भी गया था | वो माडा कामचोर था | बहाने करें जाया करदा काम तें बचण के | एक बे उह के बाबू ने उह ताहि खेत में किम्मे काम कर के आण ताहि कही ते वो बोल्या अक उह के ओले पाँ में चंनक (मोच )आरी स अर आपणे बाबू ताहि लंगडा-लंगडा के चाल कें दिखा दिया | उह का बाबू उह की दादी ताहि छोरे का पाँ सेंखन की कह के ने खेताँ में आप चाल्या गया | अर बाबू के जांदे-ए नसीब लाग्या बालकां में खेलण | जब दोफारी सी में उह का बाबू आया ते उहने वो दूर तें-ए देख लिया अक इह के ते किम्मे भी ना होर्या | नसीब ने आप्णा बाबू कती लव आ लिया जब देखा अर फेर लंगड़आण का नाटक करणं लाग गया पर कुनसे पाँ में चनक आ ऋ स न्यू भूल गा | अर वो इबके सोले पाँ तें लंगडावे था | फेर उह के बाबू ने काटया वो गेर के ने | चोरी खातर भी अक्कल चाहिए |


Bhaisahab in kisso ko ek kitab mein likho or baaki dunia ko bhi enjoy karne do.....

maja aa gaya ji...time to time likhte raho bhai ji
 
Bhaisahab in kisso ko ek kitab mein likho or baaki dunia ko bhi enjoy karne do.....

maja aa gaya ji...time to time likhte raho bhai ji

भाई सब इंजॉय -ए ते करण लाग रे सें किहने रोके सें | अर किताब पे भी काम चाल रया स | पहलम "द लास्ट विक्टरी " खरीद के पढ़ ल्यो |
 
एक बे गर्मियां की छुट्टियां में सब बालकां ने घडघेडे बणाए | किहे ने पुराणी चप्पलआँ के , अर किहे ने तार के ,अर उन् के पाछे पत्रे की ट्रेली जोड़ ली | इह काम में, में एक्सपर्ट था , सब के में-ए बणा के दिया करदा | पर मेरे धोरे आपणा घडघेड़ा कोणी था , अर दुसर्यां के सब के बाणानदा हांडऊँ | सारे बालक बारी-बारी आपणा घडघेड़ा मन्ने दे देंदे , अक क्यूँ उन् ने फेर बणवाणा पड सके था ज्यां तें | सारे जणे जोहड़ माँ तें आपणी-आपणी ट्रेलियाँ में माटी लयांदे अर मेन्ह्स्याँ के ठाण में गेरदे | पर आपणे घडघेडे का ते न्यारा-ए सुवाद हो स | ना मेरे धोरे तार अर ना मेरे धोरे पुराणी हवाई चप्पल | पुराणी चप्पल , सारी भुंडी ढाल घिस री थी ,उन् का पहिया बण-ए कोणी सके था | मेरा काका कँवल सिंह फौज में तें छुट्टी आया ,अर मेरी काकी ताहि हवाई चप्पल दुआ के ल्याया | में ऊँ भी , उह काकी तें घणा चिडया करदा मेरा काका जो भी चीजो लायान्दा सारी आप खा जांदी , हाम बालकां ताहि ते बस गाल में छोतके फेंक्या करदी , चिडान खातर(इब्ब पाछले मिहने जो दुर्घटना होई थी उह में मुसकल तें या काकी बची स एक मिहना कोमा में थी)| मेरे वे चप्पल नजरां में चढ़गी अर आगले दिन मेरा भी घडघेड़ा त्यार था | सारी गाल में बात फेल गी अक कँवल की बहु की नई चप्पल उठ गी | अर मेरी काकी की नजर सब के पायां पे अक कोए नई चप्पल पहरे दीख जा अर में कई बे मेरी काकी की गेल जोहड़ पे भी गया घडघेड़ा ले के ने | पर मेरी काकी के कित समझ आवे थी अक चप्पल पायां में ना चाल्दी , वे ते घुम्मण लाग री सें,उस्से के पायां के-ए साहर: | चातर चप्पल चोर |
 
जब हाम -छोटे-छोटे थे ते एक जट्टू बोली का संस्कृत वर्जन बणा राख्या था | जा और किहे ने भी बोली होगी ते बेरा न पर एक दो और गामां में हामने माडा-मोटा हेर-फेर की गेल सुणी थी | हाम म्हारे मास्टराँ के आगे भी कई बे उनकी चुगली या फेर किम्मे इस्सी बात जो मास्टर ताहीं ना बताणी ,उनके आगे-ए कर लिया करदे | मास्टराँ के किम्मे समझ में-ए ना आंदी | कई बे मास्टराँ ने परतिबंध भी लाया अक या भाषा नि बोलणी स | यु किस्सा बन्या न्यू अक मास्टर म्हारी क्लास में बडदें-ए न्यू बोल्या अक आज में तमने एक नया कारनामा कर के ने दिखाउंगा | इब्ब वो के करण आला था हमने ते कोणी बेरा | म्हारी आपणी बोली में एक बड्डा सा छोरा मुछ्याँ आला बहेड दे सी ने बोल्या "इस्मीब तुस्मु केसमे अस्मंडेसमे देस्मेवे गास्मा "| इब्ब जिन्न ने इह बोली का ना बेरा वे भी चकरागे होंगे ,इह का मतलब में पाछे बताउंगा | या बात सुणदे -ए सारी क्लास पाट के ने पड़ी | मास्टर चकरा गा अक या के होई अर इह छोरे ने के कह दी | उन् ने कईयाँ धोरे बुझी, पर सब न्यू बोले अक हाम ने ना बेरा इह ने के कही स | पर उह ने वा बात नोट कर ली अर दूसरी क्लास के बालकां धोरे बुझ ली अक इह का मतलब के हो स | फेर ते आगले दिन म्हारे उह ने ओड़डे ले ले के ने सब के घणे मारे | विधार्थी भाषा संघ जिंदाबाद |



इब्ब इह बोली के बारे में बताउंगा |"इस्मीब तुस्मु केसमे अस्मंडेसमे देस्मेवे गास्मा "|का मतलब स "इब्ब तू के अंडे देवेगा "| इह बोली में "स" अर "म" दो अक्षराँ का किहे भी शब्द के बीचाले परयोग होवे स अर या एक नई बोली बन्न जावे स | आज काल बेरा ना या बोली शायद लुप्त प्राय हो गी स | इह के संरक्षणं की खातर किम्मे ना किम्मे करणा पडेगा |
 
जब हाम आठमी में पढ्या करदे | ते सकूल में आये साल पुराणे खेल के सामान को बोली लाग्या करदी | टूटी के माड़ी घशी होड़ हाकी , पुराणी फूटबाल ये-ए दो सामान घण्ने होया करदे | आये साल बालक सस्ते में ये चीज बोली में ले लेंदे अर फेर हाम सांझ ने फिरणी में खेल्दे | इब्ब जिह बालक की फूटबोल होंदी ,वो-ए कप्तान होया करदा घनखरे नियम आपणी मर्जी के थोप्दा ,जा उह का कोए विरोध करे ते उह ने खिलाण तें नाट जांदा | आपणी मर्जी की टीम आपणे कानी खड़ी कर लेंदा | कुल मिला के फूटबोल उह का कद म्हारे सब तें बड्डा कर देंदी ,चाहे वो बालक क्याहें जोगा ना हो | ते एक बे मन्ने भी न्यू सोची अक आपां भी फूटबाल ल्यावांगे इबके आली बोली में ,अर फेर रोब जमावांगे गाल के बाल्कां पे | जब सिक नै हाकी या फूटबाल १०-१२ रापियाँ की आजाया करदी , अर बोली में दो या ढाई रापियाँ में था जांदी | पर म्हारे धोरे ते दो-ढाई रपिये भी ना होया करदे | जब बोली लागी ते मन्ने मेरी माँ धोरे पिस्से मांगे ,ते मेरी माँ नाट गी अक बोलबाला आपणी पढ़ाई कर अर खेत में काम कर फ़ालतू में पिस्से ना खिंडाया करें | में ते मन मशोश के ने रह गा ,गाळ की टीम का कप्तान बणन का सपना फिरणी की धूळ में रळ गा | कोए ना , बोली लागी अर सामान पे नंबर गेर -गेर के ने पि.टी.आई ने बाल्कां ताहि पर्ची दे दी अक जिह ने जो बोली लाइ स ,वे उनने पिस्से हेडमास्टर धोरे भर के ने अर तडके आपणा सामान ले जाइओ | आगले दिन हाम भी पोंच्गे पि.टी.आई के कमरे में बस ललचाई नजरां तें सामान ने बस सूंघ-सूंघ देखां अक काश या फूटबाल म्हारी होंदी | होया इसा अक एक छोरा पर्ची ले के ने आया अर मास्टर ने वा पर्ची ले के ने धर ली अर और किम्मे काम करण लाग्या | अर फेर न्यू भूल गा अक या पर्ची कुण्से बालक ने दी थी | उह ने ते एक फूटबाल ठाई अर मेरे ताहि दे दी , न्यू सोच के ने अक वा पर्ची मन्ने दी थी | में तें उड़े एक सेकेण्ड भी ना डटया ,ले फूटबाल अर ठा बस्ता में ते कती कप्तान बन लिया था गाळ की टीम का ,अर जांदा रहया | फेर में ते दो-तीन दिन सकूल में भी ना गया अक कदे मास्टर पिछान ना ले ,मन्ने | अर पाछे बेरा पाट्टया अक उह छोरे ताहि उह मास्टर ने दूसरी फूटबाल दे दी थी | पर उह साल मन्ने भी कती आंडी बण के गाळ के बाल्कां पे खूब धोंस जमाई | पर कई जणे घणे कमीण थे जाण बूझ के ने सूलाँ में लात मार देंदे , अर उह में पंचर हो जांदे | पर उह साल पाछे आपणा कोन्फिदेंस भोत बध गा कप्तानी का अर आज ताहीं आपां जित जावां उड़े-ए कप्तानी जमा लिया कराँ | सुखा कप्तान |
 
हाम तीन जाणे पाली जाया करदे ,पहलम भी मन्ने बताई थी उन् में तें दो मेरे घरां में तें ताऊ के छोरे थे | एक बे गर्मियां की बात स म्हारे खेत के धोरे एक कुल्फी बेचनिया धोले डराम ने पाडन लाग्र्या था | ये डराम तारकोल के होया करदे जो खाली होयें पाछे पि.डब्लू.ड़ी आले सड़काँ के साहरे गाड़ दिया करदे अर उप्पर तें सफेदी मार देंदे | ये एक तरां के संत्रां के वार्निंग होया करदे ,आजकाल ते सिमट के आवें सें अर उनका परयोग बंद होगया | हामने वो पकड़ लिया एक हाम तन्ने इब्ब बेलदार ताहि पकड़वावांगे | ते उहने म्हारे ताहीं २ रपिये अर २-२ कुल्फी दे दी | हामने न्यू बुझी एक जा हाम तन्ने ये पाड़-पाड़ ने दे देवां ते तू किन्ने पिसे देवेगा | वो बोल्या एक एक ड्रम का पांच रपिये दे देगा | बस फेर के था हामने रोज एक डराम पाड़ना शरू कर दिया | मेरे पाली दोस्त मन्ने ला देंदे पाडन खातर | आक में सारयां में छोटा था अर जा कोए पि.डब्लू.डी आला आ भी ग्या ते न्यू कह के ने एक बालक स गलती होगी अर मन्ने छुड्या लेवेंगे | हामने उन् गर्मियां म्हारे गाम ताहि के ३०-४० डराम पाड़ गेरे | अर मेरे ताहीं मेरे उन् भाइयां ने कदे कदाऊ किम्मे खुवा दिया ना ते आपणे बीडी माचिस का खरचा काढ़े गए |
 
जनाब, दुआं में ज़रूर याद रखेंगे वो आपको !

शायद उनकी ही दुआओं का असर हे ,
नाप दिया जो भी चाहा वो डगर हे |
आगे कदम बढ़ाना काम हे राही का ,
राह को कटना ही हे ,होंसला बुलंद अगर हे ||
 
इब्ब एक तागे में गंडासे अर सांनी का जीकर होर्या था ते मेरे एक अल्बाद याद आगी | होया न्यू अक एक बे मेरा नया कुडता- पाजामा सीम्या था , अर सांझ सी-अक ने खेल्दी हाण वो पाट ग्या | बालक आलीये गेल -गेल घरां बताण खातर अक रविंदर का पजामा पाट ग्या ,| ये बालक बड़े सुवादु होया करें | मेरा बाबू फोजी , बिना बूझें मार्या करदा ,चाहे गलती किहे की हो छितना हामने पडया करदा | ते बालकां ने सोची, अक इब्ब इह क्र लागेंगे ,खींच-खींच के, अर हाम सुवाद ल्यांगे | पर मेरे बाबू ने पहलम ते घेर की छात पे पुली ला राखी थी , वे तरवाई २०-२५, अर गंडासे आगे गिरवादी, मन्ने सोची आज ते छितन तें , अर बेजती तें बच गा मखा | जब ताहीं म्हारे बिजली का गंडासा ना लाग्या था | अर में ११-१२ साल का था | मन्ने सोची अक त्ड्कें -तड़क गेरे लुवावेगा , ज्यां तें गिरवाई सें | में ते हरया न्यार अर बिरसम काट्या करदा , अर जुवार की पुली मेरा बाबू | जब मन्ने पुली तार ली , ते मेरा बाबू बोल्या अक हो जा शुरू | इब्ब रात के ९ बज लिए थे , अर में ला दिया जुवार की सुखी पुली काटअन | आपे गेरे लाऊं अर आपे किनछ-किनछ के गंडासा घुमाऊं | मेरा बाबू न्यू कह के ने , अक जब ये सारी पुली काट ले गा , जब सोणा स , अर ना ते तडके ताहीं लाग्या रह ,अर में तडके -तड़क आण के ने देखूंगा | चार पांच पुली काटअन में-ए एक घन्टा सारा लाग ग्या मन्ने | फेर मेरे दीमाग ने आपणा अल्बादी मोड़ ऑन कर दिया , अर बाकी बची होई पुली ते मन्ने जा धरी उलटी-ए छात पे अर ओबरे माहं तें चार-पांच छाबडे सानी के ल्या गेरे गंडासे आगे | अर में ते सो ग्या ,मखा देखि जा गी ताड्कें उठ के ने | के ते बाबा रेल में अर के बाबा जेल में | मेरा बाबू ते तडके सरसरी सी नजर मार के ने खेत में चाल्या गया अक हाँ छोरे ने काम ते तगड़ा कर राख्या स | पर मेरे बाबू ने जब पाछे सुवाद आ ग्या अर हर गलती पे पुली काटअन की सजा देवन लाग्या | कई बे ते मेरी माँ पेंडा छुडवांदी अक बालक स जाण दे , न्ल्याँ में दर्द हो जा गा | घणी स्यानपत भी कई बे सेध जाया करे | एक गलती की अनेक सजा |
 
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