[मेरे बड्डे दादा का छोट्ला छोरा मेरा काका थानसिंह ( जिह की सानी में मन्ने गार्या रलाई थी , एर जिह के बाजरे के डाम्चे के मन्ने जेवड़ी बाँध के मुफ्त में डिब्बे बज्वाएय थे ) वो-ए काका थान सिंह | ऊ का एर मेरा बैर सा होरा था | वो काम चोर था | ऊ का बड़ा भाई सिख था ,वो गुरदवारयाँ में पड्या रह्या करदा | यो किम्मे उलटा काम कर देंदा तोह ,मेरी काकी मेरे बाबु तह केंदी , अक रमिंदर(वा मन्ने नु-ए कह्या करदी ) के बाबु एक बे इह के काका ने धमकाइये | मेरा बाबु बड़ा था ,जयां तें ऊ की जिम्मेदारी थी | एर जा वो महारा किम्मे नुक्सान कर देंदा ,एर मेरा बाबु धमका देंदा तोह मेरी काकी लड़न आ जांदी , अक तम तोह म्हारा घर उजाड़ना चाहो सो थारी नजर धरती पे स( किब्बे-२ वो घर छोड़ के भज जाया करदा) | तोह म्हारा
किम्मे नुकसान कर भी देंदा ,तोह मेरा बाबु ना धम्कान्दा अक खाम खा सर हो ज्यां गे |
म्रेरे बाबु ने मेरी ड्यूटी ला राखी थी, अक स्कूल की छुट्टी पाछे रोज खेताँ में जाणा, एर आधे पट्टे का हरया (खरपतवार ) पाड्न्ना | उने में ,म्हारे कोठड़े के सहारे, नाली में कट्ठा कर कें गेर आया करदा, एर फेर मेरा बाबु उने ठा लायान्दा | योह कामचोर काका , सांझ नु ,जब में चल्या जांदा घरां ,तो आपने रह्डू में मेरा पाड्या होया हरया गेर कें डाकां आंदा | मेरे बाबु ने में धमकाया भी, अक तू हरया कोणी पाड़ कें आया ,झूठ बोले स | तोह मन्ने उनके गंडासे धोरे पड्या होए हरया दिखाया ,अक यो काम इस्से का कर्या होड़ स, एर यो तो सारा दिन कोठड़े में सूत्या पड्या रह स ,ईपे बूझो इनने कद हरया पाड्या | पर सिद्ध करें पाछे भी राड़ के डर तें ,मेरा बाबु थानसिंह तें किम्मे कोणी कंदा |मन्ने थान सिंह तें बदला लेवन की पलान बनाई अक यो जित भी फंस्ग्या उथे-ए इह तें बदला लेणा स |
म्हारा रात का ओसरा होया करदा जाड्यां में पानी का | १.५ घंटा थानसिंह का पहलम एर १.५ घंटा म्हारा पाछे | मेरा बाबु दिन में नाके -बंधे कर जाया करदा जुकर में कम तें कम हांगे में काम कर सकूं (जब में ११-१२ साल का था, एर मेरे बाबु की रत की शिफ्ट होया करदी )| थानसिंह की आदत थी अक वो लुगाई के (मेरी काकी ) के डर तें पानी पे तोह आ जांदा पर कदे थम्ब -डोली कोणी दिया करदा खेत में ,एर एक नाके पानी दिया करदा | एर किल्ला जिन्ना भर जांदा उतना-ए बाह के बो दिया करदा | उअह के कई किल्ले आये साल बिना बोये रह जांदे | तो एक रात वो आपना पानी काट कें ,एर जा सोया कोठड़े में | उनने बेरा था अक रविंदर टेम पे आवेगा, एर आप काट ले गा ,एर वारी आया तो उसका फेदा था | में तोह बदले के चक्कर में था, एर ऊ की गेल की गेल पोंच लिया खेत में, एर जुकर वो कोठड़े में जा कें सोया ,मन्ने पानी तोड़ दिया | म्हारे खेत माडे ढल्मा पड़े थे | ऊका २०-२५ खाट वारा में हांडया होया पाणी भी उतर के म्हारे खेत में आ लिया | एर डेढ़ घंटे पाछे में भी कोठड़े में जा कें, मेरे काका नु ठा कें बोल्या ,अक काका में आ लिया, एर पाणी काटू सूँ , मेरा काका बोल्या ,ठीक स कट ले | एर फेर जा बताई अक पाणी तोह पहलम तें -ए टूट रया स | तडके-तड़क फेर मेरी काकी ने धर कें लिया धार पे थानसिंह , एर निरी गाल बाकि थान सिंह ताहि | योह काण्ड मन्ने दो बे दोहराया थान सिंह गेल, फेर मेरी काकी ऊह की गेल मजदूर खंदान लागी ,जब उह का पेंडा छुट्या मेरी अल्बाद तें |